भोपाल/ग्वालियर 2 मार्च 2026। भारत की सांस्कृतिक परंपराओं में होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, बुराई पर अच्छाई की विजय और नवचेतना का प्रतीक पर्व है। बदलते वैश्विक परिवेश में भी होली भारतीय संस्कृति की जीवंतता और सामूहिकता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करती है।
होली का आध्यात्मिक आधार हमें पौराणिक कथा में मिलता है, जब भक्त प्रह्लाद की आस्था की रक्षा हेतु अत्याचारिणी होलिका का दहन हुआ। इसी कारण होली का पहला दिन ‘होलिका दहन’ के रूप में मनाया जाता है, जो अन्याय, अहंकार और अधर्म के अंत का प्रतीक है।
वहीं, ब्रजभूमि में यह पर्व विशेष उल्लास के साथ मनाया जाता है। मथुरा और वृंदावन की लठमार और फूलों की होली विश्वभर में प्रसिद्ध है। भगवान श्रीकृष्ण और राधा की रास-लीला से जुड़ी परंपराएं प्रेम, आनंद और आत्मीयता का संदेश देती हैं।
रंगों का मनोवैज्ञानिक और सामाजिक महत्व
रंग केवल बाहरी सजावट नहीं, बल्कि मानव मनोभावों के वाहक हैं।
लाल – ऊर्जा, साहस और प्रेम का प्रतीक
पीला – आशा, सकारात्मकता और ज्ञान का संकेत
हरा – प्रकृति, संतुलन और विकास का संदेश
नीला – विश्वास और गहराई का प्रतीक
होली के रंग समाज में व्याप्त भेदभाव की दीवारों को तोड़कर समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि सामाजिक समरसता ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।
आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव
होली से जुड़े व्यापार, हस्तशिल्प, वस्त्र, मिठाइयाँ और पर्यटन गतिविधियाँ स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देती हैं। ग्रामीण अंचलों से लेकर महानगरों तक यह पर्व सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लोकगीतों और पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से सामाजिक जीवन में नई ऊर्जा भरता है।
आज के समय में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक रंगों और जल-संरक्षण का संदेश भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सुरक्षित और संयमित उत्सव ही इस पर्व की गरिमा को बनाए रख सकता है।
संपादक की ओर से संदेश..
प्रिय पाठकों एवं बधु-बांधव,
होली का यह पावन पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धि और
नई आशाओं के रंग लेकर आए। हम सब मिलकर वैमनस्य, कटुता और विभाजन की मानसिकता को त्यागें तथा प्रेम, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के रंगों से समाज को सजाएं।
‘युग क्रांति’ परिवार की ओर से आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ। ईश्वर से प्रार्थना है कि यह पर्व आपके जीवन में उन्नति, स्वास्थ्य और सफलता का नया अध्याय प्रारंभ करे।
* ब्रजराज सिंह तोमर
संपादक, युग क्रांति
