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अयोध्या में ‘महानगर अध्यक्ष मॉडल’: संगठन कम, समीकरण ज्यादा

अयोध्या 18 मार्च 2026।अयोध्या की सियासत इन दिनों नामित पार्षदों की सूची से कम और महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव के “मैनेजमेंट स्किल” से ज्यादा गरम है। संगठन के भीतर चल रही फुसफुसाहट अब खुलकर सवालों में बदलती दिख रही है—क्या महानगर अध्यक्ष का पद अब कैडर नेतृत्व से ज्यादा “संबंध प्रबंधन” का केंद्र बन गया है?

सूत्र बताते हैं कि कमलेश श्रीवास्तव की बैठकों में विचारधारा कम और “कोरम पूरा करने की कला” ज्यादा नजर आती है। 3–4 पदाधिकारियों के साथ बैठक कर संगठनात्मक मजबूती का दावा करना कुछ वैसा ही है जैसे बिना खिलाड़ियों के मैच जीतने की रणनीति बनाना। कार्यकर्ताओं के बीच तंज है कि यहां मेहनत से ज्यादा ‘मित्रता’ का रजिस्टर अपडेट रहना चाहिए।

नामित पार्षदों की सूची ने इस धारणा को और हवा दी है। आरोप है कि स्थानीय सक्रिय कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर “करीबी समीकरण” साधने वालों को प्राथमिकता दी गई। खासकर एक गैर जनपद निवासी शिक्षक का नाम सामने आने के बाद यह चर्चा तेज है कि क्या अयोध्या की राजनीति अब ‘लोकल’ से ज्यादा ‘सोशल’ हो गई है? दिलचस्प यह भी है कि इस पूरी कवायद में गुटबाजी की लकीरें और गहरी होती दिख रही हैं। महापौर और अन्य वरिष्ठ नेताओं के खेमे का सीमित प्रतिनिधित्व यह संकेत दे रहा है कि संगठन में “सबका साथ” का नारा फिलहाल “अपने-अपने साथ” में तब्दील हो चुका है।

अब सवाल यह है कि क्या यह रणनीति 2027 तक संगठन को मजबूत करेगी या फिर कैडर की नाराजगी एक नई सियासी पटकथा लिखेगी। फिलहाल अयोध्या में चर्चा यही है—संगठन चले या न चले, समीकरण जरूर चलते रहेंगे।