“24 घंटे में डिलीवरी” का दावा फेल, 25 दिन बाद भी नहीं मिला सिलेंडर
ग्वालियर 3 अप्रैल 2026। एक ओर जिला कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान पेट्रोलियम पदार्थों की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं और इसके लिए जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
गैस एजेंसियों की मनमानी और लापरवाही के चलते उपभोक्ता परेशान हैं और प्रशासन के निर्देश कागजों तक सीमित होकर रह गए हैं। इस क्रम में हिमांशु इंडेन गैस एजेंसी का मामला सामने आया है।
आदेश हवा में, एजेंसियों की मनमानी जारी
कलेक्टर द्वारा गठित समिति का उद्देश्य पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। समिति को शिकायतों के त्वरित निराकरण और गैस सिलेंडरों के प्राथमिकता वितरण की जिम्मेदारी दी गई है। हर सोमवार टीएल बैठक में इसकी समीक्षा भी तय की गई है।
लेकिन सवाल यह है कि जब व्यवस्था इतनी सख्त बनाई गई है, तो फिर उपभोक्ताओं को राहत क्यों नहीं मिल रही?
शटर बंद, अंदर कर्मचारी—बाहर इंतजार में उपभोक्ता!
लश्कर स्थित हिमांशु इंडियन गैस एजेंसी का हाल तो और भी चौंकाने वाला है। यहां कर्मचारी बाहर से शटर बंद कर अंदर बैठे रहते हैं। हाल ही में एक कर्मचारी जब बाथरूम के लिए बाहर निकला—क्योंकि अंदर सुविधा नहीं है—तब इस “बंद दरवाजे के खेल” की सच्चाई सामने आई।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसी जानबूझकर शटर बंद कर काम करती है, जिससे शिकायत करने या जानकारी लेने वाला कोई भी व्यक्ति अंदर न पहुंच सके।
15 दिन से कॉल, 25 दिन से इंतजार_फिर भी नहीं सिलेंडर
पीड़ित उपभोक्ताओं के मुताबिक—15 दिनों से लगातार फोन किए जा रहे हैं। बुकिंग के बाद मैसेज आता है कि “24 घंटे में डिलीवरी” होगी लेकिन हकीकत यह है कि 25 दिन बीतने के बाद भी सिलेंडर नहीं पहुंचा
बुकिंग के बाद मिलने वाला मैसेज—
“Dear Customer, we have received your call. If you are an active Indane customer, your request will be processed within 24 hrs…”
यह मैसेज अब उपभोक्ताओं के लिए मजाक बनकर रह गया है।
जिम्मेदार कौन? सिस्टम या लापरवाह एजेंसियां?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिम्मेदार कौन है?
क्या जिला प्रशासन की निगरानी सिर्फ बैठकों तक सीमित है?
या फिर गैस एजेंसियां जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर रही हैं?
जब कलेक्टर स्तर पर मॉनिटरिंग हो रही है, समिति गठित है और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हैं, तब भी इस तरह की लापरवाही कहीं न कहीं सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती है।
अब सरकार और जिला प्रशासन से आम जनता द्वारा कार्रवाई की दरकार है। ग्वालियर में गैस आपूर्ति की यह स्थिति न सिर्फ उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा रही है, बल्कि प्रशासनिक दावों पर भी सवाल खड़े कर रही है। जरूरत है कि ऐसे मामलों में सिर्फ बैठकें नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई हो—ताकि एजेंसियों की मनमानी पर लगाम लग सके और आम जनता को राहत मिल सके।
