प्रक्रियाओं पर सवाल, जिम्मेदारियों की परतें खुलने लगीं
भोपाल। मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) को लेकर इन दिनों गंभीर आरोपों की चर्चा तेज है। विभागीय कार्यप्रणाली पर नजर डालने वाले समीक्षकों, सूत्रों और इलेक्ट्रॉनिक गलियरों का दावा है कि स्थानांतरण से लेकर टेंडर स्वीकृति और बिल भुगतान तक की प्रक्रियाओं में अनियमितताओं की आशंका लगातार जताई जा रही है। इन चर्चाओं ने न केवल विभाग बल्कि शासन की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इस क्रम में जल संसाधन विभाग का सजायाफ्ता उपयंत्री काफी समय से चर्चाओं में है।
बताया जा रहा है कि कई मामलों में एक ही कार्य के लिए अलग-अलग स्तरों पर स्वीकृतियों और निरीक्षण के नाम पर कथित लेन-देन की स्थिति बनती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही सूचनाओं ने माहौल को संदेहपूर्ण बना दिया है।
नेटवर्क, ट्रैप और संरक्षण के आरोप
अनौपचारिक सूत्रों और इलेक्ट्रॉनिक गलियारों के अनुसार, विभागीय अधिकारियों और बाहरी संपर्कों के बीच समन्वय बैठकों के जरिए कथित आर्थिक लेन-देन की रणनीतियां बनाई जाती हैं। वहीं, लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाइयों में पकड़े गए कुछ अधिकारियों के हवाले से यह भी चर्चा है कि उन्हें उच्च स्तर से संरक्षण मिलने की धारणा बनी हुई है।
पुराने मामलों को देखें तो यह आरोप भी उभरकर सामने आते हैं कि रिश्वत प्रकरणों में फंसे कुछ अधिकारियों को बाद में महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी दी गई। हालांकि इन सभी बिंदुओं पर संबंधित विभाग या शासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
खबर के इन आरोपों और चर्चाओं के बीच नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या यह पूरा मामला उच्च स्तर तक पहुंचेगा। जानकारों का मानना है कि यदि ये विषय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के संज्ञान में आये तो सख्त कार्रवाई संभव है। फिलहाल स्थिति स्पष्ट होने के लिए निष्पक्ष जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी माना जा रहा है।
