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सम्राट मिहिर भोज के शिलालेख पर विवाद के बीच सामंजस्य की उम्मीद

दोनों पक्षों की भावनाओं और ऐतिहासिक दावों का सम्मान करते हुए प्रशासन से निष्पक्ष समाधान की मांग; क्षत्रिय महासभा कल संभाग आयुक्त को सौंपेगी ज्ञापन

ग्वालियर, 11 सितंबर 2026। सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा पर लगे शिलालेख को लेकर उठे विवाद के बीच अब मामला केवल विरोध और दावों तक सीमित न रहकर दोनों वर्गों के बीच सामंजस्य और सम्मानजनक समाधान की दिशा में ले जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी क्रम में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा एवं अन्य क्षत्रिय संगठन शुक्रवार को संभाग आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियों और मांगों से अवगत कराएंगे।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष इं. राजेंद्र सिंह भदौरिया के नेतृत्व में संगठन दोपहर 3:30 बजे संभाग आयुक्त कार्यालय पहुंचेगा। महासभा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं कार्यालय प्रमुख ललित सिंह तोमर ने कहा कि संगठन ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर अपनी बात प्रशासन के सामने रखेगा। उनका कहना है कि सम्राट मिहिर भोज का सम्मान किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है और उनके ऐतिहासिक व्यक्तित्व को लेकर समाज में किसी प्रकार का वैमनस्य पैदा होना उचित नहीं है।

विवाद का शांतिपूर्ण समाधान जरूरी

महासभा का कहना है कि ग्वालियर के चिरवाई नाके पर शासकीय भूमि एवं शासकीय कोष से स्थापित सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के शिलालेख को लेकर स्थापना के समय से ही आपत्ति दर्ज कराई जाती रही है। संगठन का तर्क है कि सार्वजनिक स्थान पर स्थापित ऐतिहासिक महापुरुष की प्रतिमा के शिलालेख को लेकर ऐसा समाधान होना चाहिए, जिससे किसी भी समाज की भावनाएं आहत न हों और ऐतिहासिक तथ्यों के साथ भी न्याय हो।

वहीं, पूर्व में एक अन्य समाज के प्रतिनिधियों द्वारा भी संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगें रखी गई हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती दोनों पक्षों की भावनाओं को समझते हुए ऐसा रास्ता निकालने की है, जो विवाद को बढ़ाने के बजाय सामाजिक सौहार्द को मजबूत करे।

इतिहास का सम्मान, समाज में सौहार्द

क्षत्रिय महासभा का दावा है कि सम्राट मिहिर भोज क्षत्रिय कुल के इक्ष्वाकु वंश से संबंधित थे और क्षत्रिय समाज उन्हें आराध्य एवं प्रेरणास्रोत मानता है। संगठन का कहना है कि हम आर-पार की लड़ाई में भी हर स्थित से निपटने में सक्षम है लेकिन फिर भी संगठन इस संबंध में ऐतिहासिक तथ्यों एवं प्रमाणों के साथ अपना पक्ष जांच एजेंसियों और न्यायालय के समक्ष भी रख रहा है।

इस पूरे विवाद में आमजन की राय अनुसार सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सम्राट मिहिर भोज जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व को लेकर किसी भी वर्ग के बीच टकराव की स्थिति न बने। प्रशासन यदि दोनों पक्षों को साथ बैठाकर उपलब्ध ऐतिहासिक प्रमाणों, कानूनी स्थिति और सार्वजनिक भावनाओं के आधार पर निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ाता है, तो इससे विवाद के स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान की राह खुल सकती है।