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सीएम हेल्पलाइन पर अब बहाने नहीं चलेंगे: मुख्य सचिव की सख्ती के बाद कलेक्टरों की जवाबदेही तय

शासकीय जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत मिली तो तत्काल कार्रवाई के निर्देश, बिना जवाब शिकायत आगे बढ़ाने वाले एल-1 अधिकारी निशाने पर

भोपाल। मध्यप्रदेश में सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति करने वाले निचले प्रशासनिक तंत्र पर अब शिकंजा कसने के संकेत साफ हैं। मुख्य सचिव श्री अशोक वर्णवाल ने सभी कलेक्टरों को स्पष्ट कर दिया है कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत को लंबित रखना या केवल औपचारिक जवाब देकर आगे बढ़ा देना स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसी शिकायत सामने आते ही संबंधित प्रशासन को तत्काल कार्रवाई कर शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना होगा।

मुख्य सचिव ने 100 दिन से अधिक समय से लंबित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि कोई एल-1 अधिकारी शिकायत का उचित जवाब दिए बिना उसे अगले स्तर पर भेजता है तो उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए।

शिकायत ट्रांसफर करना नहीं, समाधान करना होगा

सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज होने के बाद कई मामलों में निचले स्तर पर वास्तविक कार्रवाई के बजाय जवाब देकर या शिकायत को अगले अधिकारी के पास भेजकर जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति सामने आती रही है। मुख्य सचिव के निर्देश ने इसी कार्यशैली पर सीधा प्रहार किया है।

खास तौर पर शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में अब प्रशासनिक अधिकारियों को केवल रिपोर्ट तैयार करने के बजाय जमीन पर कार्रवाई का परिणाम दिखाना होगा। यानी शिकायत का निस्तारण फाइल में नहीं, मौके पर दिखाई देना चाहिए।

100 दिन पुरानी शिकायतें बनीं प्रशासन की कसौटी

मुख्य सचिव की समीक्षा का फोकस 100 दिवस से अधिक समय से लंबित शिकायतों पर रहा। इसका सीधा अर्थ है कि सरकार अब केवल नई शिकायतों के निस्तारण के आंकड़े नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित मामलों की वास्तविक स्थिति पर भी नजर रख रही है।

मुख्य सचिव वर्णवाल  की लगातार समीक्षा से कलेक्टरों और उनके अधीनस्थ प्रशासनिक अमले पर जवाबदेही बढ़ने की संभावना है। खासकर उन अधिकारियों के लिए यह स्पष्ट संदेश है जो शिकायतों को निपटाने के बजाय एक टेबल से दूसरी टेबल तक पहुंचाकर समय निकालते रहे हैं।

सीएम हेल्पलाइन को प्रभावी बनाने की दिशा में अब असली परीक्षा निचले स्तर के प्रशासन की होगी—शिकायत कितनी जल्दी बंद हुई, यह नहीं; शिकायतकर्ता की समस्या वास्तव में कितनी जल्दी हल हुई, यह महत्वपूर्ण होगा।