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MPRRDA: सवालों के घेरे में पूरा सिस्टम_ युगक्रांति की दस्तक से मचा हड़कंप, आखिर डर किस बात का ?

71 PIU पर गंभीर धांधलियों के आरोप

भोपाल/ग्वालियर। युग क्रांति की खोजी टीम ने जैसे ही संविदा कर्मियों के भरोसे संचालित मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (MPRRDA) के ग्वालियर संभागीय कार्यालय में सामान्य तौर पर दस्तक दी, वहां का माहौल अचानक असामान्य दिखाई देने लगा। सुरक्षा गार्ड का बदला हुआ व्यवहार, लैब टेक्नीशियन की हड़बड़ाहट, कर्मचारियों की बेचैनी और अधिकारियों के चेहरे पर दिखाई दे रहे असुरक्षा का भाव मानो किसी अंदरूनी खेल की ओर इशारा कर रही थी! इन परिस्थितियों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनकी तह तक पहुंचने के लिए युग क्रांति का खोजी अभियान जारी है।

प्रदेश में मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) और मध्य प्रदेश भवन विकास निगम (MPBDC) जैसे विभाग भी संविदा कर्मियों के सहारे बड़े पैमाने पर परियोजनाओं का संचालन कर रहे हैं और समय-समय पर आरोपों के घेरे में आते रहे हैं, लेकिन सूत्रों का दावा है कि कारगुजारियों के मामले में मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण कहीं अधिक आगे निकल चुका है।

ग्वालियर- चंबल संभाग सुर्खियों मे

सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के 51 जिलों में से 49 जिलों में फैली कुल 75 परियोजना क्रियान्वयन इकाइयों (PIU) में से 71 PIU गंभीर वित्तीय और तकनीकी अनियमितताओं के आरोपों से घिरी हुई हैं। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच हो जाए तो करोड़ों रुपये के खेल और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका उजागर हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि इसी विभाग से जुड़े मामलों में दतिया के तत्कालीन महाप्रबंधक और उप महाप्रबंधक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार के बजाय मनमानी और कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।

सड़कों की बदहाली को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय भी सख्त रुख अपना चुका है और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दे चुका है। इसके बावजूद ग्वालियर-चंबल अंचल के गोहद, मेहगांव, डबरा सहित अनेक विकासखंडों से गारंटी अवधि पूरी होने से पहले ही सड़कें उखड़ने, गड्ढों में तब्दील होने और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने की शिकायतें लगातार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंच रही हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जनता की गाढ़ी कमाई से बनने वाली सड़कें गारंटी अवधि के भीतर ही जवाब दे रही हैं, जब शिकायतों का अंबार लगा हुआ है, जब न्यायालय तक को हस्तक्षेप करना पड़ा है, तब आखिर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

सड़कों की दुर्दशाक्या MPRRDA में सब कुछ ठीक है, या फिर फाइलों और परियोजनाओं के पीछे कोई ऐसा खेल चल रहा है जिसे छिपाने की कोशिश की जा रही है?

युग क्रांति की खोजी पड़ताल जारी है… आने वाले खुलासे कई चेहरों की चाल और चरित्र से पर्दा उठा सकते हैं।