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PWD में ‘राय दरबार’ का राज? टेंडर से भुगतान तक ‘बाल सखा सिस्टम’ के गंभीर आरोप

फर्जी बिल, संदिग्ध मशीनें और ठेकेदारों का आरोप _ ‘प्रदीप राय को नाराज़ किया तो भुगतान बंद’

भोपाल/छतरपुर। मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) में इन दिनों सड़क निर्माण से ज्यादा चर्चा “सिस्टम” की हो रही है। आरोप इतने गंभीर हैं कि अब सवाल सिर्फ एक टेंडर का नहीं, बल्कि पूरे विभागीय तंत्र की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर खड़े हो गए हैं जिसने विभाग के तकनीकी मुखिया प्रमुख अभियंता को ही बड़े सवालों के घेरें खड़ा कर दिया है?

छतरपुर कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने PWD के प्रमुख अभियंता (ENC) के. पी.एस. राणा और उनके गृह ग्राम पेतपुरा, टीकमगढ़ के पड़ोसी तथाकथित बाल सखा ठेकेदार प्रदीप राय  पर ऐसा नेटवर्क चलाने का आरोप लगाया है, जिसमें टेंडर से लेकर बिल भुगतान तक सब कुछ “रिश्तों” के आधार पर तय हो रहा है।

एसोसिएशन का आरोप है कि प्रदीप राय की गिर्राज कंस्ट्रक्शन/इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी को पिछले सात महीनों में 25 करोड़ से अधिक के काम नियमों को ताक पर रखकर दिलाए गए। लेकिन जब स्थानीय ठेकेदारों ने इसकी शिकायत ENC, प्रमुख सचिव और मुख्यमंत्री तक पहुंचाई, तो कार्रवाई होने के बजाय शिकायतकर्ताओं पर ही आर्थिक दबाव बनाया जाने लगा।

आरोप है कि छतरपुर कार्यपालन यंत्री आशीष भारती ने उन ठेकेदारों के बिल रोक दिए, जो प्रदीप राय के खिलाफ खड़े हुए थे। ठेकेदारों का दावा है कि उन्हें साफ शब्दों में कह दिया गया —

“पैसा विभाग से आ चुका है, लेकिन भुगतान उसी को मिलेगा, जिसका नाम प्रदीप राय के जरिए ENC साहब ओके करेंगे।”

यानी सरकारी खजाना अब विभागीय प्रक्रिया से नहीं, कथित “राय दरबार” की अनुमति से खुल रहा है।

5.27 करोड़ के टेंडर से उठा बड़ा बवाल

पूरा विवाद टेंडर आईडी 2025-PWDRB-4516-1 से जुड़े 5.27 करोड़ रुपए के छतरपुर-रजपुरा-पाथापुर सड़क निर्माण कार्य को लेकर है। टेंडर की शर्त थी कि ठेकेदार के पास खुद की JCB, टैंडम रोलर और मोटर ग्रेडर जैसी भारी मशीनें होना अनिवार्य है। एसोसिएशन का आरोप है कि गिर्राज कंपनी के पास इनमें से जरूरी मशीनें थीं ही नहीं, लेकिन पात्रता साबित करने के लिए कथित फर्जी दस्तावेज लगा दिए गए। शिकायत के मुताबिक प्रदीप राय की कंपनी ने रियान इन्फ्रासोल्यूशन के नाम से टैंडम रोलर खरीदने का बिल लगाया।

लेकिन मामला तब पलट गया जब संबंधित कंपनी ने लिखित में स्पष्ट कर दिया कि उसने गिर्राज कंपनी को ऐसा कोई टैंडम रोलर बेचा ही नहीं। बताया जा रहा है कि बिल का इनवॉइस नंबर 112517 भी संदिग्ध पाया गया।

मामले का दूसरा हिस्सा और ज्यादा चौंकाने वाला बताया जा रहा है। टेंडर में जिस RTO नंबर MP16DA0382 का उल्लेख किया गया, वह रिकॉर्ड में किसी भारी मोटर ग्रेडर का नहीं बल्कि BS-III मिनी ग्रेडर का बताया जा रहा है। इतना ही नहीं, इनवॉइस में भी मॉडल S-3218 मिनी ग्रेडर दर्ज है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब शर्त भारी मशीन की थी, तो “मिनी मशीन” को पात्र कैसे मान लिया गया?

जांच भी उसी से कराई, जिसने सिफारिश की

एसोसिएशन का आरोप है कि अन्य पात्र कंपनियों को तकनीकी कारण बताकर बाहर कर दिया गया, जबकि कथित फर्जी दस्तावेजों वाली कंपनी को टेंडर दे दिया गया। सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब शिकायत के बाद जांच उसी अधिकारी सागर मुख्य अभयंता सी.पी. सिंह को सौंप दी गई, जिसने खुद टेंडर की सिफारिश की थी।

इस फैसले के बाद विभाग में यह तंज खुलेआम सुनाई देने लगा _मुर्गी चोरी हुई और चौकीदार लोमड़ी को बना दिया गया।”

पहले वफादारी, फिर भुगतान ?

छतरपुर कांट्रेक्टर एसोसिएशन अब खुलकर आरोप लगा रही है कि विभाग में भुगतान की नई अनौपचारिक नीति लागू हो चुकी है —“प्रदीप राय से संबंध अच्छे हैं तो बिल पास, वरना फाइल होल्ड।”

ठेकेदारों का कहना है कि जिन लोगों ने समय पर सरकारी काम पूरे किए, उन्हें अब अपने ही भुगतान के लिए निजी सिफारिश ढूंढनी पड़ रही है। गुस्साए ठेकेदारों ने चेतावनी दी है कि यदि भुगतान रोके जाने और कथित प्रताड़ना का सिलसिला नहीं रुका तो छतरपुर में काम बंद कर आंदोलन किया जाएगा।

विभाग का क्या कहना है

“रोड वाले पुराने काम की जांच हो चुकी है जिसमें सभी दस्तावेज सही पाए गए, प्रदीप राय ठेकेदार से ईएनसी सब के क्या संबध है यह मैं नहीं जानता, किन ठेकेदारों अथवा उनके संगठन को कार्यों के बिल भुगतान की क्या समस्या है ऐसी हमें जानकारी नहीं है और ना ही इस सबंध में किसी ने मुझसे अथवा कार्यालय में संपर्क किया”।                                 आशीष भारती, कार्यपालन यंत्री- छतरपुर

“शिकायत की जांच विधिवत हो चुकी है सभी कागजात वगैरा चेक किए गए जो सही पाए गए, मामले की शिकायत ऊपर तक की गई थी जिसकी विधिवत जांच की गई। बिलों के भुगतान संबंधी शिकायत पर मैंने और ईएनसी साहब ईई को फटकार लगाते हुए कहा है कि किसी भी ठेकेदार के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, सभी का भुगतान नियम अनुसार बल के आधार पर किया जाए_हालांकि अभी बजट आया नहीं है”।                                                          सीपी सिंह, मुख्य अभियंता -सागर परिक्षेत्र

फिलहाल छतरपुर में ठेकेदारों की फाइलें दबी हैं, भुगतान अटका है और विभागीय पारदर्शिता कटघरे में खड़ी दिखाई दे रही है। आरोप बेहद गंभीर हैं, जो कहीं ना कहीं विभाग प्रमुख और विभागीय तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। यह जांच का विषय है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो मामला सिर्फ एक सड़क परियोजना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे PWD सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह बन सकता है।