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आबादी के बीच धधकता ‘अवैध ईंट उद्योग’, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

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मऊ – जमाहर क्षेत्र में कई अवैध चिमनियां सक्रिय, प्रदूषण से हालात बिगड़े..

ग्वालियर 20 अप्रैल 2026। एक ओर जिला प्रशासन वायु गुणवत्ता सुधार के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के आबादी वाले क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित ईंट भट्टों की चिमनियां खुलेआम प्रदूषण फैला रही हैं। शताब्दीपुरम क्षेत्र के मऊ -जमाहर एवं आस पास क्षेत्र में दर्जनों अवैध चिमनियां धड़ल्ले से संचालित होकर न केवल नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं, बल्कि स्थानीय वातावरण को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।

शासकीय जमीन पर अवैध संचालन, बिना अनुमति उत्पादन

सूत्रों के अनुसार, खुशालीराम प्रजापति द्वारा सीलिंग की शासकीय भूमि पर बिना माइनिंग और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की अनुमति के बड़े पैमाने पर ईंटों का उत्पादन किया जा रहा है। यह गतिविधि पूरी तरह अनाधिकृत बताई जा रही है, जो विगत कई वर्षों से कथित तौर पर संचालित हैं। इसके चलते क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है।

सूत्रों की माने तो लगभग दो वर्ष पहले कलेक्टर ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए बड़ी कार्रवाई की गई थी, जिसके अंतर्गतअनाधिकृत चिमनी चिमनियों को ध्वस्त कराया था। बावजूद इसके, अंदरूनी सांठ-गांठ के चलते ये चिमनियां फिर से चालू हो गईं। यह सवाल खड़ा करता है कि कार्रवाई के बाद भी अवैध गतिविधियां कैसे फिर से पनप गईं।

यहां अनुमति से भी कई गुना अधिक उत्पादन के आरोप सामने आ रहे हैं। नियमों के अनुसार, यदि कथित संचालक प्रजापति को अनुमति मिलती है तो एक सीजन में अधिकतम 9 लाख ईंटों का उत्पादन संभव है। लेकिन आरोप है कि अवैध रूप से संचालित इन चिमनियों में 70 से 80 लाख तक ईंटों का उत्पादन किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।

प्रशासनिक संरक्षण के आरोप, विभागीय भूमिका संदिग्ध

सूत्रों का दावा है कि चिमनी संचालक खुद यह कहते हैं कि उन्हें कलेक्टर कार्यालय/ कलेक्ट्रेट और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का संरक्षण प्राप्त है, इसलिए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।

यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि डीडी नगर स्थित पॉल्यूशन विभाग के कुछ अधिकारी/कर्मचारी- साहू और राठौर -इन गतिविधियों को संरक्षण दे रहे हैं, जबकि कलेक्टर कार्यालय में भी अंदरूनी स्तर पर सांठ-गांठ की बात सामने आ रही है।

पूरे क्षेत्र में फैला अवैध नेटवर्क

जानकारी के अनुसार, खुशालीराम प्रजापति सहित इस क्षेत्र में करीब 12 चिमनियां इसी तरह नियमों के विरुद्ध संचालित हो रही हैं मगर अन्य के विरुद्ध युग क्रांति के पास ठोस सबूतों की कमी है इसीलिए पड़ताल अभी जारी है। यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

अब देखना यह होगा कि ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों पर क्या ठोस कार्रवाई करते हैं, या फिर यह मामला भी ‘सांठ-गांठ’ के आरोपों को और मजबूत करेगा?