मोमोज के ठेले पर मामूली विवाद में युवक की गोली मारकर हत्या, पुलिस के अपराध नियंत्रण के दावों पर बड़ा सवाल
ग्वालियर। शहर में अपराधियों के हौसले किस कदर बढ़ गए हैं, इसकी एक और भयावह तस्वीर गुरुवार शाम बहोड़ापुर क्षेत्र में सामने आई। आनंद नगर चौराहे के पास मोमोज के ठेले पर हुए मामूली विवाद के बाद ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय विवेक मीणा की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात के बाद आरोपी स्कूटी से फरार हो गए।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह वारदात किसी सुनसान इलाके में नहीं, बल्कि लोगों की आवाजाही वाले बाजार क्षेत्र में हुई। यानी अपराधियों को न पुलिस का खौफ दिखा और न कानून का।
कॉम्बिंग गश्त में 222 वारंटी पकड़े, फिर सड़क पर खुलेआम गोली कैसे?
ग्वालियर पुलिस लगातार अपराधियों पर शिकंजा कसने, कॉम्बिंग गश्त करने और हथियारबंद बदमाशों को पकड़ने की कार्रवाई का दावा करती रही है। जुलाई में पुलिस ने एक ही कॉम्बिंग अभियान में 222 फरार वारंटियों को गिरफ्तार करने और 270 गुंडों व हिस्ट्रीशीटरों की चेकिंग की जानकारी दी थी।
लेकिन सवाल यह है कि अगर पुलिस की निगरानी इतनी मजबूत है तो फिर अपराधी हथियार लेकर खुलेआम घूम कैसे रहे हैं?
ग्वालियर में यह पहला मामला भी नहीं है जब मामूली विवाद हिंसक वारदात में बदला हो। जुलाई में भी पुलिस ने एक हत्या के मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी और अवैध हथियार रखने वाले बदमाशों के खिलाफ लगातार कार्रवाई का दावा किया है। फिर भी गुरुवार की शाम एक युवक को मामूली कहासुनी के बाद गोली मार दी जाती है। यही विरोधाभास ग्वालियर पुलिस की अपराध नियंत्रण रणनीति पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है।
कप्तान साहब, कार्रवाई वारदात के बाद नहीं, वारदात से पहले क्यों नहीं?
पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। यह कार्रवाई जरूरी है, लेकिन असली सवाल गिरफ्तारी के बाद का नहीं, वारदात से पहले की पुलिसिंग का है। अगर अपराधी हथियार लेकर घूम रहे हैं, पुराने अपराधियों और हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी हो रही है और पुलिस लगातार कॉम्बिंग अभियान चला रही है, तो फिर शहर में एक मामूली विवाद गोलीकांड में कैसे बदल गया?
मृतक विवेक मीणा के परिजनों और समर्थकों ने शव लेकर बहोड़ापुर थाने के सामने प्रदर्शन किया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
ग्वालियर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के सामने अब चुनौती केवल इस हत्याकांड के आरोपियों को पकड़ने की नहीं है। चुनौती यह साबित करने की है कि पुलिस की पूरी कवायद सिर्फ वारदात के बाद प्रेस नोट जारी करने तक सीमित नहीं, बल्कि अपराधियों में वारदात से पहले कानून का वास्तविक भय पैदा करने में भी सक्षम है।
क्योंकि सवाल अब सिर्फ विवेक मीणा की हत्या का नहीं है—सवाल यह है कि ग्वालियर की सड़कों पर अगली गोली किसके लिए चलने वाली है?
