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कलेक्टर के संज्ञान के बाद भी खानापूर्ति? दस्तावेजों के विपरीत नामांतरण का खेल जारी!

1.67 बीघा की रजिस्ट्री, लेकिन 3.97 बीघा का नामांतरण; क्या यह सिर्फ ‘टाइपिंग मिस्टेक’ या बड़ा राजस्व खेल?

ग्वालियर। युग क्रांति द्वारा ग्वालियर ग्रामीण तहसील के ग्राम कल्याणपुरा में प्रकाशित सनसनीखेज खुलासा—“राजस्व रिकॉर्ड में जमीन शून्य, फिर भी 1584 वर्गफुट की रजिस्ट्री! ग्वालियर में किसके संरक्षण में चला कथित भूमि खेल”—पर कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एसडीएम को जांच के निर्देश दिए थे। किंतु एक माह बीतने के बाद भी जांच की दिशा और गति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि एसडीएम प्रदीप शर्मा जांच अधिकारी- नायाब तहसीलदार पुरानी छावनी से रिपोर्ट आने पर करवाई की बात कर रहे हैं।

सी बीच युग क्रांति की पड़ताल में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने राजस्व व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। यहां गरीब किसानों द्वारा केवल 1.67 बीघा भूमि की रजिस्ट्री किए जाने के बावजूद करीब 3.97 बीघा भूमि का नामांतरण कर दिया गया। यदि उपलब्ध दस्तावेज सही हैं, तो इसे सामान्य लिपिकीय त्रुटि मानना कठिन है।

खेरिया कुलैथ का मामला: रजिस्ट्री 0.418 हेक्टेयर की, नामांतरण 0.993 हेक्टेयर का

मामला तहसील कुलैथ के ग्राम खेरिया कुलैथ का है। दस्तावेजों के अनुसार ग्राम के निवासी सहादात खां, कल्लन खां, चांद खां एवं मन्नू खां ने दिनांक 16 जनवरी 2020 को सर्वे क्रमांक 298/1 एवं 295/4/मिन-4 की कुल 1.817 हेक्टेयर भूमि में से 0.418 हेक्टेयर (लगभग 1.67 बीघा) भूमि विनय नगर निवासी श्रीमती सुषमा शर्मा, पत्नी सत्यप्रकाश शर्मा के पक्ष में विक्रय की। लेकिन इसी विक्रय विलेख के आधार पर 16 जून 2025 को 0.993 हेक्टेयर (लगभग 3.97 बीघा) भूमि का नामांतरण कर दिया गया। अर्थात जिस रजिस्ट्री में 0.418 हेक्टेयर भूमि का हस्तांतरण हुआ था, उसी के आधार पर उससे कई गुना अधिक भूमि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर दी गई।

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि तत्कालीन तहसीलदार विजय शर्मा द्वारा जारी आम इश्तिहार में रजिस्ट्री क्रमांक MP142602020A1037572 का उल्लेख तो किया गया, किंतु उसमें भी रजिस्ट्री के वास्तविक रकबे 0.418 हेक्टेयर के स्थान पर 0.993 हेक्टेयर अंकित कर दिया गया। इसके बाद कथित रूप से पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर बिना मूल दस्तावेजों का समुचित परीक्षण किए नायब तहसीलदार द्वारा नामांतरण आदेश पारित कर दिया गया।

‘छोटी सी मिस्टेक’ या गंभीर प्रशासनिक लापरवाही?

युग क्रांति द्वारा की गई पड़ताल में विभागीय सूत्र इस मामले को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं। कुछ इसे मात्र टाइपिंगरजिस्ट्री का पेज मिस्टेक बता रहे हैं, जबकि कुछ अधिकारियों पर दबाव की बात कह रहे हैं। दूसरी ओर तत्कालीन नायब तहसीलदार विजय शर्मा ने इसे “छोटी सी मिस्टेक” बताते हुए यह सवाल उठाया कि विक्रेताओं ने समय रहते इसे सुधरवाने का प्रयास क्यों नहीं किया।

लेकिन सवाल यह है कि यदि रजिस्ट्री और नामांतरण के रकबे में इतना बड़ा अंतर था, तो दस्तावेजों की जांच के दौरान यह त्रुटि किसी भी स्तर पर क्यों नहीं पकड़ी गई? क्या राजस्व अभिलेखों में दर्ज होने वाले प्रत्येक आंकड़े का सत्यापन करना संबंधित अधिकारियों की वैधानिक जिम्मेदारी नहीं है?

इस बीच प्रभावित किसान न्याय की उम्मीद में लगातार तहसील के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक राहत नहीं मिल सकी है।

क्या कलेक्टर करेंगी निर्णायक कार्रवाई?

युग क्रांति के पास उपलब्ध दस्तावेजों और अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर ग्राम कल्याणपुरा और खेरिया कुलैथ के मामलों में गंभीर अनियमितताओं की आशंका व्यक्त की जा रही है। यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि दस्तावेजों के विपरीत जानबूझकर नामांतरण किए गए हैं, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक जांच का विषय भी बन सकता है।

ऐसी स्थिति में अपेक्षा है कि कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान अपने दंडाधिकारी अधिकारों का प्रभावी उपयोग करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराएं तथा यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी अथवा पक्षकार की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ धोखाधड़ी, कूटरचना, आपराधिक षड्यंत्र तथा शासकीय अभिलेखों के दुरुपयोग जैसे प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कराने की दिशा में भी आवश्यक कदम उठाएं।

कलेक्टर मैडम ने इस पर लिया संज्ञान..

राजस्व रिकॉर्ड में जमीन शून्य, फिर भी 1584 वर्गफुट की रजिस्ट्री! ग्वालियर में किसके संरक्षण में चला कथित भूमि खेल?