सरकारी खजाने पर 53% अतिरिक्त बोझ के लिए कौन जिम्मेदार ?
भोपाल/मंडला। मध्य प्रदेश भवन विकास निगम (बीडीसी) की निर्माण परियोजनाओं में एक चिंताजनक प्रवृत्ति लगातार सामने आ रही है। अधिकांश परियोजनाएं जिस लागत पर स्वीकृत होती हैं, उनके पूर्ण होने से पहले ही संशोधित डीपीआर (Revised DPR) के नाम पर करोड़ों रुपये की अतिरिक्त राशि मांगी जाती है। बुधनी और मंडला में निर्माणाधीन शासकीय मेडिकल कॉलेज इसका ताजा और सबसे चर्चित उदाहरण बन गया है। बुधनी मामला युग क्रांति द्वारा हाल में उजागर किया गया।
नवंबर 2021 में मंत्रिपरिषद ने मंडला मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए लगभग 250 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी। लेकिन मार्च 2026 में यही परियोजना बढ़कर लगभग 382 करोड़ रुपये पहुंच गई। यानी करीब 132 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत का संशोधित प्रस्ताव शासन के समक्ष रखा गया।
18 मार्च 2026 को मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई परियोजना निरीक्षण समिति की बैठक में बीडीसी ने लागत वृद्धि का कारण परियोजना स्थल परिवर्तन बताया। निगम का तर्क था कि पहले चयनित भूमि का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा नर्मदा के डूब क्षेत्र में था, इसलिए नया स्थल चुनना पड़ा। मुख्य सचिव ने इस दलील पर गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए गलत स्थल चयन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
टेंडर के बाद बदला गया स्थल, सवाल अब भी कायम
सूत्रों के अनुसार मेडिकल कॉलेज की भूमि का चयन जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने वर्षों पहले किया था। उसी के आधार पर डीपीआर बनी, प्रशासनिक स्वीकृतियां मिलीं और टेंडर भी जारी हो गया। लेकिन टेंडर स्वीकृत होने के बाद अचानक उसी भूमि को अनुपयुक्त बताकर नया स्थल चुन लिया गया।
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जिस भूमि को डूब क्षेत्र बताकर खारिज किया गया, जबकि वहां कभी नर्मदा का पानी नहीं पहुंचा। यदि यह दावा सही है तो फिर डूब क्षेत्र का आधार क्या था? और यदि भूमि वास्तव में अनुपयुक्त थी तो प्रारंभिक सर्वेक्षण किसने किया?
सूत्रों का यह भी दावा है कि स्थल परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया नोएडा की डीपीआर कंसल्टेंट एजेंसी “वस्तु निधि” के सुझावों के बाद आगे बढ़ी। इससे यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या बीडीसी के तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका अब केवल कंसल्टेंट की रिपोर्ट पर मुहर लगाने तक सीमित रह गई है?
कंसल्टेंट की पिच पर अधिकारीयों और ठेकेदारों की बल्लेबाजी… क्रमशः आगे
