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कुंवारी नदी में गणपति विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा, तीन युवक डूबे; प्रशासनिक इंतजामों पर उठे गंभीर सवाल

कनावर में पुल के नीचे हादसा, कृष्णा, अभिजीत और मदन भदौरिया की तलाश जारी; मौके पर पुलिस, रेस्क्यू टीम रवाना

भिंड। ऊमरी थाना क्षेत्र के कनावर गांव में गणपति विसर्जन के दौरान शनिवार को कुंवारी नदी में बड़ा और बेहद दर्दनाक हादसा हो गया। गणपति प्रतिमा विसर्जित करने पहुंचे तीन युवक नदी में डूब गए। डूबने वालों की पहचान कृष्णा भदौरिया, अभिजीत भदौरिया और मदन भदौरिया, निवासी कनावर के रूप में सामने आई है।

हादसा कनावर में कुंवारी नदी के पुल के नीचे हुआ। घटना की सूचना मिलते ही ऊमरी थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। तीनों युवकों की तलाश के लिए रेस्क्यू टीम को बुलाया गया है। फिलहाल नदी में उनकी तलाश जारी है और प्रशासन की ओर से विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

किनारे मिलीं कई जोड़ी चप्पलें, क्या तीन से ज्यादा लोग थे?

हादसे के बाद नदी किनारे बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। स्थानीय लोगों के मुताबिक नदी किनारे करीब पांच जोड़ी चप्पलें पड़ी मिली हैं। इससे मौके पर यह आशंका भी जताई जा रही है कि नदी में तीन से अधिक लोग तो नहीं गए थे। हालांकि पुलिस के अनुसार फिलहाल तीन लोगों के डूबने की ही जानकारी सामने आई है। जब तक रेस्क्यू और पुलिस की जांच पूरी नहीं होती, इससे अधिक लोगों के डूबने की बात की पुष्टि नहीं की जा सकती।

विसर्जन की व्यवस्था पर उठे सवाल

हादसे के बाद प्रशासनिक इंतजामों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए नदी में सीधे उतरने की स्थिति रोकने के लिए इस बार पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव के कार्यकाल में गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए नदी से अलग कृत्रिम कुंड/तालाब जैसी व्यवस्था की गई थी, ताकि श्रद्धालुओं को गहरे पानी में उतरना न पड़े। इस बार ऐसी व्यवस्था नहीं होने को लेकर लोग प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं। हादसे के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि यह आरोप स्थानीय लोगों के हैं और हादसे की वास्तविक परिस्थितियों तथा प्रशासनिक स्तर पर की गई व्यवस्थाओं की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता नदी में डूबे तीन युवकों की तलाश को लेकर है। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने और पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और क्या इससे बचने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।