16 जून के स्थानांतरण आदेश का अब तक नहीं हुआ पालन, विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल
इंदौर 3 अगस्त 2026। मध्यप्रदेश शासन के वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग मंत्रालय द्वारा 16 जून 2026 को जारी व्यापक स्थानांतरण आदेशों के बावजूद इंदौर में पदस्थ पांच आबकारी अधिकारी अब तक कार्यमुक्त नहीं किए गए हैं। लगभग डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी आदेश का पालन नहीं होने से विभागीय अनुशासन और शासन की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शासन के आदेश में 29 सहायक जिला आबकारी अधिकारी/प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी, 32 आबकारी उपनिरीक्षकों तथा 6 उपनिरीक्षकों को उच्च पद प्रभार के साथ स्थानांतरित किया गया था। इनमें इंदौर से स्थानांतरित किए गए पांच अधिकारी आज भी पुराने स्थान पर कार्यरत बताए जा रहे हैं।
स्थानांतरण आदेश के अनुसार:
- रविशंकर पुरोहित (आबकारी उपनिरीक्षक, संभागीय उड़न दस्ता इंदौर) को उच्च पद प्रभार के साथ कार्यवाहक प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी, शाजापुर।
- आशीष जैन (आबकारी उपनिरीक्षक) को इंदौर से सीहोर।
- कमलेश सोलंकी (कार्यवाहक सहायक जिला आबकारी अधिकारी) को इंदौर से सागर।
- श्रीमती विनीता सागर (सहायक जिला आबकारी अधिकारी) को इंदौर से राजगढ़।
- गोपाल यादव (सहायक जिला आबकारी अधिकारी) को इंदौर से राजगढ़ पदस्थ किया गया था। मगर आज तक यह इंदौर में अपने पुराने पद पर जमे हुए है।
रिलीविंग की जिम्मेदारी, लेकिन आदेश अब तक अधूरा
जानकारी के अनुसार, संभागीय उड़न दस्ता के उपनिरीक्षक रविशंकर पुरोहित को कार्यमुक्त करने की जिम्मेदारी उपायुक्त इंदर सिंह जामोद की है, जबकि शेष चार अधिकारियों को रिलीव करने का दायित्व सहायक आयुक्त अभिषेक तिवारी के पास बताया जा रहा है। इसके बावजूद अब तक आदेश का पालन नहीं होने से विभाग के भीतर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सूत्रों के हवाले से कई तरह की चर्चाओं के अनुसार, कमलेश सोलंकी और सहायक आयुक्त अभिषेक तिवारी पूर्व में एक ही बैच के उप निरीक्षक रहे हैं। जिसके चलते यह अत्यंत विश्वस्त बताए जाते हैं एवं इसी नाते कथित अर्थव्यवस्था संभालते हैं। वहीं आशीष जैन को भी विभाग में सहायक आयुक्त का करीबी माना जाता है। गोपाल यादव के संबंध में भी पुराने कार्यकाल से निकटता की चर्चाएं हैं। जिसके चलते इन्हें इंदौर के दो महत्वपूर्ण सर्किल्स मालवा मिल A और आंतरिक 1 पर जमे हुए हैं। साथ ही सहायक जिला आबकारी अधिकारी गोपाल यादव की सहायक आयुक्त तिवारी से भोपाल पद स्थापना के दौरान यारी बतया जा रहा है।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
बड़ा सवाल: शासन का आदेश प्रभावी या सिर्फ कागजी?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी इंदौर के यह अधिकारी महीनों तक पुराने पदों पर बने रहें, तो शासन के आदेशों की प्रभावशीलता पर क्या संदेश जाता है? क्या विभागीय स्तर पर किसी के संरक्षण में आदेशों की अनदेखी हो रही है, या फिर इसके पीछे कोई प्रशासनिक कारण है?
अब निगाहें विभाग के आयुक्त और प्रमुख सचिव पर टिकी हैं। देखना होगा कि वे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर शासन के आदेशों का पालन सुनिश्चित करते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।
(यदि संबंधित अधिकारी या विभाग इस मामले में अपना पक्ष प्रस्तुत करता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
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