मंत्री तोमर की पहल सकारात्मक, लेकिन सियासत हावी
ग्वालियर 18 अप्रैल 2026। शहर की पुरानी सीवर समस्या को लेकर आखिरकार ज़मीनी पहल शुरू हो गई है, लेकिन इसके साथ ही सियासी आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। मध्यप्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने शनिवार को 3.15 करोड़ रुपये की “सुपर सकर” मशीन का लोकार्पण कर सीवर सफाई अभियान की शुरुआत की और साफ तौर पर कांग्रेस शासित नगर निगम को अब तक की अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार ठहराया।
चुनौती स्वीकार की है, बदलाव लाकर दिखाएंगे – ऊर्जा मंत्री
कांच मिल क्षेत्र से अभियान की शुरुआत करते हुए मंत्री तोमर ने कहा कि उन्होंने सीवर सफाई के काम को चुनौती के रूप में स्वीकार किया है और अब आधुनिक तकनीक के जरिए व्यवस्था को तेज और प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने 18 से 30 अप्रैल तक सफाई का विस्तृत शेड्यूल भी घोषित किया और जनकल्याण समितियों को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी।
नगर निगम पर सीधा हमला करते हुए मंत्री प्रद्युम्न तोमर ने बिना लाग-लपेट के कहा कि शहर की सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है, लेकिन वह अपने दायित्व से बच रहा है। उन्होंने कांग्रेस शासित निगम पर वर्षों से सीवर समस्या का समाधान न कर पाने का आरोप लगाया।
जिम्मेदारी पर उठे बड़े सवाल
हालांकि, मंत्री के इस बयान के साथ ही जिम्मेदारी को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। गौरतलब है कि राज्य में सरकार भारतीय जनता पार्टी की है और नगरीय प्रशासन विभाग सीधे तौर पर मंत्री कैलाश विजयवर्गी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के अधीन काम करता है। ऐसे में नगर निगम के प्रशासनिक ढांचे से लेकर आयुक्त और कर्मचारियों तक की जवाबदेही भी राज्य शासन के दायरे में आती है।
इसी वजह से सवाल यह उठ रहे है कि यदि व्यवस्था में खामियां हैं, तो उसका ठीकरा केवल महापौर या कांग्रेस शासित नगर निगम पर फोड़ना कितना उचित है? क्या सरकार और संबंधित विभागों को भी इसकी जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए?
“सिर्फ आरोप नहीं, आत्ममंथन भी जरूरी”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ग्वालियर की सीवर समस्या वर्षों पुरानी है और इसमें विभिन्न स्तरों पर लापरवाही रही है। ऐसे में समाधान के लिए सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि समन्वय और जवाबदेही तय करना जरूरी है।
विकास के दावों के बीच सफाई पर फोकस करते हुए मंत्री तोमर ने अपने संबोधन में स्वास्थ्य, सड़क, शिक्षा और खेल के क्षेत्र में बदलाव का दावा करते हुए कहा कि ग्वालियर जल्द ही स्वच्छता में नंबर एक बनेगा। उन्होंने अतिक्रमण हटाने और नागरिक सहभागिता पर भी जोर दिया।
सीवर सफाई के लिए आधुनिक मशीन और अभियान निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके साथ छिड़ी सियासत यह साफ करती है कि शहर की मूल समस्या अभी भी जिम्मेदारी तय करने के सवाल में उलझी हुई है। अब देखना होगा कि यह अभियान वास्तव में जमीनी बदलाव लाता है या फिर यह भी आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में सिमट कर रह जाता है।
