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‘GEN’ के लिए शून्य सीट, शून्य अवसर”: क्या यही है सामाजिक न्याय?

सामान्य वर्ग पर सरकार का कुठाराघात?

भोपाल/मध्यप्रदेश। सरकारी भर्तियों में अवसरों का संतुलन एक बार फिर सवालों के घेरे में है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े बीमा चिकित्सा पदाधिकारी (Health Insurance Officer) और सहायक शल्य चिकित्सक के 55 पदों पर इंटरव्यू घोषित हुए हैं, जिन्हें मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित किया जा रहा है_लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इन सभी पदों में जनरल वर्ग के लिए एक भी सीट नहीं रखी गई है। यह सिर्फ एक भर्ती नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है जहां एक वर्ग को पूरी तरह बाहर कर दिया जाता है।

जब टैक्स देने की बात आती है, तो हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाता है। लेकिन जब अवसरों की बारी आती है, तो वही वर्ग “अदृश्य” क्यों हो जाता है? 55 में 0—यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि एक कड़ा संकेत है।क्या यह संयोग है या नीतियों का असंतुलन?

मेरिट बनाम व्यवस्था—जिम्मेदारी किसकी?

राज्य में सत्ता भारतीय जनता पार्टी की है और नीतिगत फैसले भी उसी के नेतृत्व में लिए जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या “सामाजिक न्याय” के नाम पर एक वर्ग को पूरी तरह शून्य कर देना उचित है? हर मंच पर “मेरिट” की बात होती है, लेकिन जमीन पर उसकी झलक क्यों नहीं दिखती? कांग्रेस पर तुष्टिकरण का आरोप लगाने वाली भाजपा भी वही खेल खेल रही है।

चुप्पी क्यों? अब सवाल जरूरी

समाज के नाम पर सक्रिय रहने वाले कई संगठन इस मुद्दे पर मौन हैं। युवा पूछ रहा है_जब जिम्मेदारी निभाने की बारी आती है तो हम सबसे आगे,लेकिन अधिकार की बारी आते ही हम पीछे क्यों? सरकार हमारे साथ दोयम दर्जे का बर्ताव क्यों कर रही है!

यह लड़ाई किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था से है। लिहाजा अब वक्त है_सवाल पूछने का, जागरूक होने का, अपनी आवाज़ बुलंद करने का और सरकार को आईना दिखाने का।

यह मुद्दा सिर्फ एक भर्ती का नहीं, बल्कि समान अवसर और न्याय की परिभाषा का है। अगर आज भी इस पर गंभीर चर्चा नहीं हुई, तो आने वाले समय में यह असंतुलन और गहरा सकता है। युवाओं ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि यदि कोई भी पार्टी अथवा उसके नेता सामान्य वर्ग के हितेषी नहीं है तो चुनाव में_ इनमें से किसी को नहीं अर्थात उपरोक्त में से कोई नहीं यानी_NOTA पर वोट करेंगे। इस व्यवस्था के साथ लड़ने के लिए अब इसी हथियार का भरपूर प्रयोग करेंगे।

अब फैसला व्यवस्था को करना है—संतुलन बनाए या सवालों के घेरे में खड़ी रहे।