मोदी के जन्मदिन से एक महीने तक चलेगा अभियान, अधिकारियों को जिम्मेदारियां तय कर मॉनीटरिंग के निर्देश; जनभागीदारी के नाम पर सरकारी मशीनरी को मैदान में उतारने की तैयारी
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस 17 सितंबर से मध्यप्रदेश में शुरू होने जा रहा ‘सेवा-संकल्प अभियान’ महज सेवा गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले इस पूरे अभियान में दीप प्रज्ज्वलन, चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं, नुक्कड़ नाटक, आंगनवाड़ी कार्यक्रम, कलश यात्राएं, विकास पुस्तिकाओं का वितरण, हितग्राही शिविर, ह्यूमन रंगोली, स्टार्टअप कार्यक्रम और सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर एक्सचेंज जैसे करीब एक दर्जन कार्यक्रम प्रस्तावित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अभियान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने, प्रभावी मॉनीटरिंग करने तथा जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय और अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में सवाल यह है कि सेवा-संकल्प अभियान की गतिविधियों में जनता की स्वैच्छिक भागीदारी कितनी होगी और सरकारी तंत्र की भूमिका कितनी?
शाम 7 बजे प्रदेशभर में एक साथ जलेंगे दीप
अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी के जन्म दिवस पर ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम से होगी। उज्जैन के महाकाल महालोक सहित प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों के प्रत्येक वार्ड में शाम 7 बजे एक साथ दीप प्रज्ज्वलित करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य इस आयोजन के माध्यम से दीप प्रज्ज्वलन का विश्व रिकॉर्ड बनाने का है।
इसी दिन सभी स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में रक्तदान शिविर भी लगाए जाएंगे। सरकार ने रक्त संग्रह, परिवहन और संग्रहण की व्यवस्था के निर्देश भी दिए हैं। यानी प्रधानमंत्री के जन्म दिवस से शुरू होने वाला यह अभियान एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे एक महीने तक चलने वाला सरकारी आयोजन होगा।
एक महीने तक कार्यक्रमों की लंबी फेहरिस्त
19 से 26 सितंबर तक ‘मेरे सपनों का भारत’ के तहत जिलास्तर पर चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं तथा 4-5 अक्टूबर को राज्यस्तरीय प्रतियोगिताएं होंगी। इनमें सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेजों की भागीदारी प्रस्तावित है।
19 सितंबर से 5 अक्टूबर तक ‘नमो सेवा-अनकही कहानियां’ के तहत सार्वजनिक स्थलों पर नुक्कड़ नाटक होंगे। 26 सितंबर से 5 अक्टूबर तक आंगनवाड़ियों में ‘आंगन मिलन सेवा’ होगी। इसमें बच्चों और माताओं के लिए स्वल्पाहार, खेल व पठन सामग्री के साथ स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण, एनीमिया और स्वच्छता की जानकारी देने की योजना है।
17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा की कहानी’ के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के संदेश जारी किए जाएंगे। 7 अक्टूबर को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ निकालने तथा जिला विकास पुस्तिकाएं वितरित करने की योजना है।
2 से 10 अक्टूबर तक ‘सेवा मेरा योगदान’ और ‘सेवा सेतु’ कार्यक्रम होंगे। सेवा सेतु के तहत विकासखंड और नगरीय निकाय स्तर पर शिविर लगाकर पात्र हितग्राहियों को सरकारी योजनाओं का लाभ मौके पर देने की बात कही गई है।
ह्यूमन रंगोली से सोशल मीडिया तक
9 और 10 अक्टूबर को भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और अलीराजपुर में बड़े पैमाने पर ‘ह्यूमन रंगोली’ बनाने की योजना है। 12 अक्टूबर को ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ होगा, जबकि 17 अक्टूबर को नई दिल्ली में ‘सुशासन सेवा संवाद’ प्रस्तावित है।
इसके अलावा ‘25 साल-25 कहानियां’ के तहत गणमान्य नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग के परिवारों को केंद्र सरकार से प्राप्त किट भेंट करने तथा ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा इन्फ्लूएंसर एक्सचेंज’ के तहत अन्य राज्यों से आए सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसरों को प्रदेश के जिलों का भ्रमण कराने की योजना भी रखी गई है।
सरकार इसे सेवा, जनभागीदारी और प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन के उजास से जोड़ रही है। लेकिन इतनी बड़ी गतिविधियों में सरकारी मशीनरी, प्रशासनिक संसाधनों और सार्वजनिक धन के उपयोग का वास्तविक पैमाना क्या होगा—यह सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
ग्वालियर कलेक्ट्रेट के एनआईसी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष से कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, नगर निगम आयुक्त श्री अभिषेक चौधरी और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सोजान सिंह रावत सहित संबंधित अधिकारी बैठक में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में कार्यक्रमों की तैयारी, प्रतिभागियों के आवागमन, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
अब देखना यह होगा कि ‘सेवा-संकल्प’ के नाम पर आयोजित होने वाली इन गतिविधियों में जनभागीदारी का स्वरूप क्या रहता है और सरकारी तंत्र पर पड़ने वाला प्रशासनिक एवं वित्तीय भार कितना होता है।
