भ्रष्टाचारियों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी, क्या मध्य प्रदेश भी अपनाएगा ऐसा मॉडल?
भोपाल। पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार और अवैध वसूली से अर्जित संपत्तियों को जब्त कर उनकी नीलामी करने के लिए सख्त कानूनी व्यवस्था बनाई जाएगी। साथ ही CAG रिपोर्टों के आधार पर पुराने मामलों की जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तेज करने की घोषणा भी की गई है।
ऐसे समय में सवाल मध्य प्रदेश से भी पूछा जाना स्वाभाविक है। प्रदेश में वर्षों से सड़क निर्माण, भर्ती, खनन, नगरीय विकास, परिवहन और अन्य विभागों में भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते रहे हैं। जांच समितियां बनती हैं, निलंबन होते हैं, लेकिन यदि अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियां सुरक्षित बनी रहें तो भ्रष्टाचार पर वास्तविक अंकुश कैसे लगेगा?
यदि किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि की संपत्ति यह सिद्ध हो जाए कि वह भ्रष्टाचार या अवैध वसूली से अर्जित है, तो केवल विभागीय कार्रवाई या स्थानांतरण पर्याप्त नहीं माना जा सकता। ऐसी संपत्तियों की जब्ती और नीलामी जैसे कठोर प्रावधान भ्रष्टाचार के विरुद्ध अधिक प्रभावी निवारक साबित हो सकते हैं।
मध्य प्रदेश सरकार यदि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को और प्रभावी बनाना चाहती है, तो केवल मुकदमे दर्ज करना ही नहीं, बल्कि अवैध संपत्ति जब्ती जैसे कानूनी विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार करना होगा। आखिर जनता का धन जनता के काम आए या भ्रष्टाचारियों की तिजोरियों में बंद रहे—यह फैसला शासन व्यवस्था को करना है।
सवाल यही है_क्या मध्य प्रदेश अन्य राज्यों को सुशासन की नसीहत देने के बजाय, भ्रष्टाचारियों की अवैध संपत्ति जब्त करने जैसे कठोर कदम उठाकर उदाहरण बनेगा?
