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देश में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य समय से 5 वर्ष पहले हासिल, सरकार ने इंजन खराब होने और माइलेज घटने के दावों को बताया भ्रामक

सरकार का दावा-1.90 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बची, किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय; E20 पर फैली भ्रांतियों का तथ्यात्मक जवाब जारी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दावा किया है कि भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले हासिल कर लिया है। सरकार के अनुसार वर्ष 2013-14 में जहां एथेनॉल मिश्रण 1.5 प्रतिशत से भी कम था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इस उपलब्धि के साथ सरकार ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में E20 को लेकर फैली विभिन्न आशंकाओं और दावों का भी विस्तृत तथ्यात्मक खंडन जारी किया है।

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से वर्ष 2014-15 से अब तक लगभग 1.90 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत, 310 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल का आयात प्रतिस्थापित, 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी तथा किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय होने का दावा किया गया है।

सरकार का कहना है कि भारत अपनी कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 88.5 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में देश में उत्पादित गन्ने, मक्का और चावल से बनने वाला एथेनॉल आयात निर्भरता कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और विदेशी मुद्रा बचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

इंजन खराब होने और माइलेज घटने की आशंकाओं पर सरकार का जवाब

सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 ईंधन से इंजन खराब होने या बड़े पैमाने पर तकनीकी नुकसान के दावों का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। वाहन निर्माता कंपनियों, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), इंडियन ऑयल और SIAM द्वारा व्यापक परीक्षणों के बाद ही E20 को लागू किया गया।

सरकार के अनुसार वास्तविक परिस्थितियों में माइलेज में 30 प्रतिशत गिरावट का दावा भी गलत है। उसका कहना है कि माइलेज पर वाहन चलाने की शैली, रखरखाव, टायरों का दबाव और अन्य तकनीकी कारकों का प्रभाव कहीं अधिक पड़ता है। मारुति सुज़ुकी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि 20 किलोमीटर प्रति लीटर माइलेज देने वाले वाहन में औसतन केवल लगभग 0.6 किलोमीटर प्रति लीटर की कमी देखी गई।

बीमा, वारंटी और ईंधन गुणवत्ता पर भी स्पष्टीकरण

सरकार ने कहा कि E20 के उपयोग से वाहन की वारंटी अथवा बीमा दावों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि पेट्रोल में गन्ने का रस सीधे नहीं मिलाया जाता, बल्कि वैज्ञानिक औद्योगिक प्रक्रिया से तैयार ईंधन-ग्रेड एथेनॉल का ही उपयोग किया जाता है।

सरकार ने कहा कि भारत इस दिशा में अकेला देश नहीं है। अमेरिका में E10 और E15, ब्राज़ील में E27, जबकि जापान, कनाडा, थाईलैंड तथा कई यूरोपीय देशों में भी एथेनॉल मिश्रित ईंधन का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।

युग क्रांति पहले से उठा रहा था यह मुद्दा

गौरतलब है कि ‘युग क्रांति’ समाचार पत्र ने भी पिछले कई महीनों से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। समाचार पत्र ने लगातार ऐसे सवाल प्रकाशित किए थे, जिनमें आम उपभोक्ताओं द्वारा जताई जा रही इंजन की कार्यक्षमता, माइलेज, ईंधन मूल्य निर्धारण, दीर्घकालिक प्रभाव और एथेनॉल नीति की पारदर्शिता जैसे विषय शामिल थे।
अब केंद्र सरकार ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर इन आशंकाओं को भ्रामक बताते हुए अपना पक्ष सार्वजनिक किया है। इससे एथेनॉल मिश्रण को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस को नया आयाम मिला है। ऐसे में आने वाले समय में सरकार के दावों और वास्तविक उपभोक्ता अनुभवों के बीच सामंजस्य किस हद तक स्थापित होता है, इस पर देशभर की निगाहें रहेंगी।

हालांकि बहस अभी भी जारी है:यद्यपि केंद्र सरकार ने E20 को सुरक्षित और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित बताया है, लेकिन एथेनॉल मिश्रण के प्रभाव, माइलेज, इंजन की दीर्घकालिक स्थिति तथा ईंधन मूल्य निर्धारण जैसे मुद्दों पर विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं के बीच बहस अभी भी जारी है। सरकार ने इन सभी आशंकाओं को तथ्यों के आधार पर निराधार बताते हुए एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को भारत की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।