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आबकारी अफसर पर गंभीर आरोप, निजी मुलाकातों के नेटवर्क की चर्चा ने खड़े किए सवाल

इंदौर के पॉश इलाके में कथित गतिविधियों को लेकर शिकायतें, बाहर से युवतियां बुलाए जाने के दावे

इंदौर। पिछले कई महीनों से आम और विभागीय गलियारों में इंदौर एक अजीब चर्चा में सुमार है, जिसमें आबकारी विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी एवं सहयोगी को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि शहर के एक प्रमुख मॉल के सामने स्थित होटल में अधिकारी की निजी मुलाकातों और संदिग्ध गतिविधियों का सिलसिला चलता रहा है। इन आरोपों में दिल्ली, मुंबई और अन्य प्रमुख शहरों से युवतियों को बुलाए जाने के लिए एक परिचित व्यक्ति की भूमिका होने का भी दावा किया गया है।

बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति भी इंदौर के आबकारी विभाग में है और इस सेवा प्रदाता व्यक्ति से कथित अधिकारी की पहचान काफी पुरानी है। दोनों ने अपने शुरुआती सेवाकाल में एक साथ काम किया है, यहां तक कि यह तथाकथित सर्विस प्रवाइडर अपनी सेवा के लिए इतना फेमस है कि_ इसकी तथाकथित यही ख्याति प्रशासनिक जरूरत एवं ताकत बन गई है। जिसकी पुष्टि (मंत्रालय) शासन के आदेशों की लगातार नाफरमानी से की जा सकती है।

तीन-चार माह पुरानी घटना ने बढ़ाए सवाल

मामले से जुड़ी एक अन्य गंभीर जानकारी में दावा किया गया है कि संबंधित अधिकारी बेहद करीबी इसी व्यक्ति के किसी महिला के साथ इतने अंतरंग संबंध हो गए कि महिला के वियोग में अपने हाथ की नस तक काट ली। निजी संबंधों को लेकर विवाद के बाद आत्महत्या के प्रयास जैसी ये घटना करीब 3-4 महीने पहले की है। कथित रूप से हाथ की नस काटने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया।

यह भी आरोप है कि बाद में प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले को दबा दिया गया। इन आरोपों की पुष्टि के लिए अस्पताल का रिकॉर्ड, मेडिकल दस्तावेज और उस समय मौजूद लोगों के बयान बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। युग क्रांति के द्वारा आबकारी के इन रसिक मिजाजियों के नाम का खुलासा न किया जाना_ एक सामाजिक मर्यादा और मंदिर की पवित्रता बनाए रखना है।

सवाल सिर्फ निजी जिंदगी का नहीं है_ यदि आरोप निराधार हैं तो संबंधित अधिकारी और अन्य पक्षों के पास उन्हें स्पष्ट रूप से खारिज करने का पूरा अधिकार है। लेकिन यदि किसी सरकारी अधिकारी के पद और प्रभाव का इस्तेमाल प्रेमालाप जैसी अनैतिक एवं निजी गतिविधियों को संरक्षण देने, किसी घटना को दबाने या किसी नेटवर्क को बढ़ावा देने में हुआ है, तो यह महज निजी आचरण का विषय नहीं रह जाता।