ब्रेकिंग

जन-विश्वास शिविरों की दूसरी कड़ी कल डबरा में, अब सवाल_शिविर से समाधान होगा या सिर्फ शिकायतों का रिकॉर्ड बनेगा?

हर शुक्रवार शिविर, अधिकारियों का फील्ड निरीक्षण और जनसंवाद; सरकार के ‘शत-प्रतिशत निराकरण’ के दावे की असली परीक्षा अब जमीन पर

ग्वालियर 13 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर शुरू किए गए “मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान” के तहत ग्वालियर जिले में कल 14 अगस्त को दूसरा जिला स्तरीय जन-विश्वास शिविर डबरा में आयोजित होगा। इसके साथ ही जिले के प्रत्येक नगरीय निकाय और विकासखंड में क्लस्टर स्तरीय शिविर भी लगाए जाएंगे। सरकार ने अभियान का लक्ष्य जनता से सीधा संवाद स्थापित करने और समस्याओं का शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित करना बताया है। लेकिन अब इस महत्वाकांक्षी दावे की असली परीक्षा शिविरों की संख्या नहीं, बल्कि शिकायतों के समाधान से होगी।

7 अगस्त से शुरू होकर 8 जनवरी तक चलने वाले इस अभियान में हर शुक्रवार शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। डबरा में होने वाले जिला स्तरीय शिविर में नगर पालिका क्षेत्र के सभी वार्डों के लोगों को लाभान्वित कराने की योजना है। शिविर से पहले अधिकारियों द्वारा फील्ड भ्रमण और संबंधित विभागों की संस्थाओं का निरीक्षण भी किया जाएगा। यानी सरकार ने इस बार केवल कार्यालय में बैठकर शिकायत सुनने के बजाय अधिकारी को मैदान में उतारने का मॉडल अपनाया है।

अधिकारी मैदान में उतरेंगे तो जनता भी हिसाब मांगेगी

डबरा के जिला स्तरीय शिविर में जन संवाद के साथ उद्योग संवाद भी होगा। बड़े उद्योगों, एमएसएमई और कुटीर उद्योगों से जुड़े उद्यमी अपने अनुभव साझा करेंगे तथा उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जाएगा। दूसरी ओर, जिले के घाटीगांव, डबरा और मुरार विकासखंडों में क्लस्टर स्तरीय शिविर भी लगाए जा रहे हैं। नगर निगम ग्वालियर सहित डबरा, आंतरी, बिलौआ, पिछोर, भितरवार और मोहना के नगरीय क्षेत्रों में भी शिविर आयोजित होंगे।

घाटीगांव के आरोन स्कूल परिसर में होने वाले शिविर में पांच ग्राम पंचायतों, डबरा विकासखंड के सूखापठा में सात ग्राम पंचायतों और मुरार विकासखंड के बेरजा में सात ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को जोड़ा गया है। इस लिहाज से 14 अगस्त का दिन केवल एक जिला स्तरीय कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के कई हिस्सों में एक साथ प्रशासन और जनता के आमने-सामने आने का दिन होगा।

लेकिन सवाल यह है कि क्या हर शुक्रवार लगने वाला शिविर हर शुक्रवार खत्म होने वाली समस्या भी पैदा करेगा?

जनता की शिकायत सुन लेना और उसका समाधान कर देना दो अलग-अलग बातें हैं। सड़क, पानी, बिजली, राजस्व, नगर निकाय, राशन, पेंशन, स्वास्थ्य, शिक्षा, अतिक्रमण और सरकारी योजनाओं से जुड़ी शिकायतें वर्षों से अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर काटती रही हैं। ऐसे में जन-विश्वास अभियान की सफलता तभी मानी जाएगी जब शिविर में दर्ज शिकायतों की श्रेणीवार संख्या, मौके पर निराकरण, लंबित मामलों की संख्या और तय समय सीमा में किए गए समाधान का सार्वजनिक रिकॉर्ड भी सामने आए।

छह महीने का अभियान, परिणाम का पैमाना भी तय होना चाहिए

कलेक्टर रुचिका चौहान ने जिला और क्लस्टर स्तर के शिविरों के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। जिला स्तरीय शिविरों में जिला स्तर के और क्लस्टर शिविरों में खंड स्तर के अधिकारियों की अनिवार्य मौजूदगी सुनिश्चित की गई है। यह व्यवस्था प्रशासन को सीधे जनता के सामने जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

लेकिन 7 अगस्त से 8 जनवरी तक चलने वाले इस अभियान के दौरान केवल शिविर आयोजित होना उपलब्धि नहीं माना जा सकता। असली उपलब्धि तब होगी जब जनवरी में अभियान के समापन पर प्रशासन यह बताए कि कुल कितनी शिकायतें आईं, कितनी शिकायतों का मौके पर समाधान हुआ, कितनी लंबित रहीं और लंबित मामलों की वजह क्या थी।

क्योंकि “जन-विश्वास” नाम केवल अभियान का शीर्षक नहीं है—यह प्रशासन और जनता के बीच भरोसे की परीक्षा भी है। यदि अधिकारी गांव और वार्ड तक पहुंचकर समस्या सुनते हैं, समय सीमा में समाधान करते हैं और समाधान का प्रमाण जनता के सामने रखते हैं तो शुक्रवार का यह शिविर महज सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली बदलने का माध्यम बन सकता है।

लेकिन यदि शिविरों में शिकायतें दर्ज होती रहीं, फोटो खिंचती रही, संवाद चलता रहा और वही शिकायतें अगले शुक्रवार फिर जनता के सामने मौजूद रहीं, तो “जन-विश्वास” अभियान का सबसे बड़ा सवाल भी वहीं खड़ा होगा—जनता की बात सुनी गई या सिर्फ सुनी हुई दिखाई गई?