नामांतरण और स्वामित्व योजना के काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, कलेक्टरों से बोले—पटवारियों से काम कराना आपकी जिम्मेदारी
भोपाल-ग्वालियर। मध्य प्रदेश में राजस्व कार्यों को लेकर मुख्य सचिव अशोक बरनवाल ने अब सीधे कलेक्टरों की जवाबदेही तय कर दी है। पटवारियों के आंदोलन और कामकाज में आ रही बाधाओं के बीच मुख्य सचिव ने प्रदेश के कलेक्टरों को साफ संदेश दिया है कि मैदानी अमले से निर्धारित समय-सीमा में काम कराना उनकी जिम्मेदारी है। काम नहीं हुआ तो जिम्मेदारी तय होगी और जरूरत पड़ी तो कलेक्टरों को भोपाल मुख्यालय तलब किया जाएगा। इसी बजह से ग्वालियर कलेक्टर ने 19 पटवारियों का निलंबन किया लेकिन सीएस की नाराजगी से बचने के लिए उन्हें और भी सख्त लहजा बरतने की जरूरत है।
मुख्य सचिव ने स्वामित्व योजना की प्रगति को लेकर कलेक्टरों को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पटवारियों से काम नहीं करा पाना कलेक्टरों की नाकामी माना जाएगा। कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि पटवारी निर्धारित काम समय पर पूरा करें। तहसील स्तर पर भी लापरवाही सामने आने पर संबंधित तहसीलदारों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर के खिलाफ नारेबाजी कैसे बर्दाश्त होगी?
पटवारियों द्वारा ग्वालियर सहित कुछ जिलों में कलेक्टरों के खिलाफ धरना और नारेबाजी किए जाने पर भी मुख्य सचिव का रुख बेहद सख्त रहा। उन्होंने इस तरह के प्रदर्शन पर नाराजगी जताते हुए कलेक्टरों को जिलों में अनुशासन बनाए रखने और ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
मौजूदा विवाद में पटवारी संगठनों की ओर से कलेक्टोरेट के बाहर धरना और नारेबाजी की घटनाएं सामने आई हैं। गुना में तो पटवारियों ने कलेक्टोरेट के मुख्य द्वार पर धरना देकर कलेक्टर से बाहर आकर बात करने की मांग तक की।
किसान के काम में देरी पर अब सीधे जवाबदेही
सरकार का फोकस सिर्फ स्वामित्व योजना तक सीमित नहीं है। राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अन्य प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण भी प्रशासन की प्राथमिकता में है। जिला स्तर पर जारी निर्देशों में नामांतरण जैसे प्रकरणों को निर्धारित समय में निपटाने और देरी करने वालों पर कार्रवाई की बात लगातार कही जा रही है।
मुख्य सचिव की सख्ती का सीधा संदेश है—सरकारी आदेश
का पालन नहीं होगा तो जिम्मेदारी तय होगी। पटवारी हों या तहसीलदार अथवा कलेक्टर, किसी को भी जवाबदेही से बाहर नहीं माना जाएगा।
स्वामित्व योजना में रजिस्ट्री सहित संबंधित कामों से पटवारियों के इनकार के बीच सरकार पहले ही कलेक्टरों को कार्रवाई के निर्देश दे चुकी है। अब मुख्य सचिव द्वारा कलेक्टरों को सीधे भोपाल बुलाने की चेतावनी ने पूरे राजस्व तंत्र में जवाबदेही का दबाव और बढ़ा दिया है।
मुख्य सचिव के इस एक्शन मोड से मध्य प्रदेश में एक नई उम्मीद जगी है। जिसके अंतर्गत आमजन ने युग क्रांति के माध्यम से सीएस बर्नवाल का आभार व्यक्त करते हुए अभिनंदन के साथ उनसे आग्रह किया है कि वह इसी तरह प्रदेश के अन्य विभागों पर भी अपनी दृष्टि डालें और “जर्जर होते विभागों में पनपते कुशासन” को_ सुशासन की नई दिशा देने में अपनी महती भूमिका अदा करें। क्योंकि समूचे प्रदेश का प्रशासनिक तंत्र मानो पूरी तरह से बेलगाम जैसा हो गया है।
