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मध्य प्रदेश में पटवारियों पर कार्रवाई का बड़ा अभियान: 29 बर्खास्त, 129 निलंबित, 3500 से अधिक को नोटिस!

फार्मर रजिस्ट्री से स्वामित्व योजना तक लापरवाही पर प्रशासन की कार्रवाई, ग्वालियर में 19 पटवारी निलंबित; कई जिलों में भी हुई कार्रवाई

भोपाल 9 अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश में राजस्व कार्यों में लापरवाही और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी को लेकर पटवारियों पर कार्रवाई का सिलसिला तेज हुआ है। 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदेश में करीब 29 पटवारियों को बर्खास्त, 129 को निलंबित और 3500 से अधिक पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई का दायरा किसानों की फार्मर रजिस्ट्री, ई-केवाईसी, स्वामित्व योजना, राजस्व प्रकरणों और अन्य शासकीय दायित्वों से जुड़ा है।

हालांकि, ये आंकड़े मीडिया रिपोर्टों में प्रकाशित प्रदेशस्तरीय संख्या हैं। इन्हें किसी एक आधिकारिक समेकित सरकारी आदेश से प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

ग्वालियर में 19 पटवारी निलंबित, दूसरे जिलों में भी कार्रवाई

ग्वालियर में कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर 19 पटवारियों को निलंबित किया गया। फार्मर रजिस्ट्री, स्वामित्व योजना की ई-केवाईसी, सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों और न्यायालयीन प्रकरणों में लापरवाही कार्रवाई का आधार बनी। किसानों से जुड़े कार्यों में समयसीमा का पालन नहीं करने पर प्रशासन ने संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कदम उठाए।

सागर में 12 पटवारियों के निलंबन की खबर प्रकाशित हुई है। इसके अलावा 137 पटवारियों को नोटिस जारी किए जाने का भी उल्लेख है। सागर में निलंबन की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर सामने आया था, इसलिए यहां 12 का आंकड़ा ही अधिक पुष्ट रिपोर्टों के आधार पर लिया गया है।

रीवा में 15, गुना में 4 और अशोकनगर में 3 पटवारियों के निलंबन की जानकारी भी प्रकाशित रिपोर्टों में सामने आई है। इन जिलों के आंकड़े संबंधित रिपोर्टों में दर्ज कार्रवाइयों को दर्शाते हैं; इन्हें प्रदेशस्तरीय कुल के अतिरिक्त जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

देवास में सेवाएं समाप्त, नोटिस से लेकर निलंबन तक कार्रवाई

पटवारियों पर कार्रवाईदेवास में तीन परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने की खबर सामने आई है। यह कार्रवाई नियमित पटवारियों के निलंबन से अलग प्रकृति की है। वहीं प्रदेशभर में 3500 से अधिक पटवारियों को नोटिस जारी किए जाने की खबर प्रशासनिक जवाबदेही की व्यापकता को रेखांकित करती है।

नोटिस जारी होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। इसी तरह निलंबन और सेवा समाप्ति की कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया अलग-अलग होती है। संबंधित आदेशों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किसी कर्मचारी के विरुद्ध अंतिम कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होती है।

किसानों के काम में देरी पर जवाबदेही का सवाल

फार्मर रजिस्ट्री, पीएम किसान योजना से जुड़े कार्य, ई-केवाईसी, स्वामित्व अधिकार अभिलेख और राजस्व न्यायालयों के प्रकरण सीधे किसानों तथा आम नागरिकों के हितों से जुड़े हैं। इन कार्यों में देरी होने से योजनाओं का लाभ मिलने, भूमि संबंधी रिकॉर्ड दुरुस्त होने और शिकायतों के निराकरण पर असर पड़ सकता है।

ऐसे में कार्रवाई के साथ यह देखना भी जरूरी होगा कि लंबित प्रकरणों का निराकरण कितनी तेजी से होता है, किसानों की शिकायतें कितनी कम होती हैं और संबंधित कार्यालयों में कामकाज की स्थिति में कितना सुधार आता है।