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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10 जुलाई को करेंगे प्रदेश के अतिथि विद्वानों से संवाद

रविन्द्र भवन में होगा राज्य स्तरीय सम्मेलन, सफल आयोजन के लिए चार समितियाँ गठित

भोपाल, 9 जुलाई 2026। मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के अतिथि विद्वानों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संवाद कार्यक्रम की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। इस संबंध में आयुक्त, उच्च शिक्षा द्वारा गुरुवार को आदेश जारी कर राज्य स्तरीय सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया है।

जारी आदेश के अनुसार 10 जुलाई 2026 को प्रातः 10:30 बजे भोपाल स्थित रविन्द्र भवन में प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन आयोजित होगा। सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर प्रदेशभर से आए अतिथि विद्वानों को संबोधित करेंगे।

कार्यक्रम के सुचारु संचालन के लिए मंच एवं स्वागत व्यवस्था, मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों के उद्बोधन तथा प्रतिवेदन लेखन-प्रचार, अतिथि विद्वानों की बैठक व्यवस्था तथा भोजन एवं जलपान व्यवस्था सहित चार प्रमुख समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों में उच्च शिक्षा संचालनालय के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारियों को प्रभारी बनाया गया है तथा विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों के सहायक प्राध्यापकों को सदस्य के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आदेश में सभी संबंधित प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि समिति के सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर उनके स्थान पर अन्य प्राध्यापकों की ड्यूटी लगाई जाए। सभी संबंधित अधिकारियों एवं प्राध्यापकों को कार्यक्रम स्थल पर प्रातः 8 बजे तक उपस्थित रहने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इस बीच अतिथि विद्वानों के बीच हर्ष का माहौल है और प्रसारित आमंत्रण संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अतिथि विद्वान परिवार के स्वागत एवं अभिनंदन के लिए सम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित रहने की अपील की गई है। हालांकि विभागीय आदेश में कार्यक्रम का समय प्रातः 10:30 बजे अंकित है, जबकि प्रसारित आमंत्रण पत्र में प्रातः 11 बजे का उल्लेख किया गया है। ऐसे में प्रतिभागियों के लिए विभागीय आदेश में दिए गए समय का पालन करना अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।

इस सम्मेलन को प्रदेश के हजारों अतिथि विद्वानों की लंबित मांगों, सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण और उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार के दृष्टिकोण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अतिथि विद्वानों की निगाहें मुख्यमंत्री के संबोधन और संभावित घोषणाओं पर टिकी हुई हैं।