नववर्ष का अभूतपूर्व स्वागत: पूजा एवं धार्मिक आयोजनों की गूंज मध्यप्रदेश ही नहीं वल्कि पूरे देश में
भोपाल 1 जनवरी 2026। भोपाल,ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन सहित मध्य प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों में नववर्ष 2026 का स्वागत इस बार पूरी तरह भिन्न, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चेतना से परिपूर्ण रहा। आधी रात के शोर-शराबे और पाश्चात्य आयोजनों के स्थान पर मंदिरों में घंटा-घड़ियालों की ध्वनि, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से नववर्ष का अभिनंदन किया गया।
यह दृश्य केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के अधिकांश राज्यों में पहली बार नववर्ष इसी सनातन परंपरा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। यह परिवर्तन भारतवर्ष के लिए न केवल गौरव का विषय है, बल्कि देश में बढ़ती धर्म जागरण की जनचेतना का सशक्त प्रमाण भी है।
नववर्ष के स्वागत में हर आयु वर्ग—बच्चों से लेकर युवाओं, महिलाओं एवं बुजुर्गों तक—की सहभागिता यह स्पष्ट संकेत देती है कि भारतीय समाज पुनः अपनी मूल सनातन संस्कृति, संस्कार और सभ्यता की ओर तेजी से लौट रहा है। यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण हिंदुस्तान की आत्मा को पुनः जागृत करने वाला क्षण बनकर सामने आया है।
देश में इस धार्मिक जागृति और सांस्कृतिक उन्नयन के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विभिन्न धर्म जागरण मंचों, भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय एवं राज्य सरकारों के प्रयासों के साथ-साथ धीरेंद्र शास्त्री जैसे सनातनी गुरुओं और धर्मयोद्धाओं की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिन्होंने निरंतर समाज को सनातन मूल्यों से जोड़ने का कार्य किया है।

पूरे देश में जिस श्रद्धा, आस्था और आत्मविश्वास के साथ नूतन कैलेंडर वर्ष 2026 का स्वागत हुआ, वह इस बात का स्पष्ट उद्घोष है कि भारत अब केवल आर्थिक या राजनीतिक शक्ति ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना के शिखर की ओर अग्रसर है। यह बदलाव इस ओर भी संकेत करता है कि हिंदुस्तान अब उस वैचारिक पायदान तक पहुंच चुका है, जहां “हिंदू राष्ट्र” की अवधारणा जनमानस में स्वाभाविक स्वीकार्यता प्राप्त कर रही है।
नववर्ष 2026 का यह आगाज भारत के स्वर्णिम सांस्कृतिक भविष्य की मजबूत नींव के रूप में देखा जा रहा है।
