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SIR निर्वाचन ने बिगाड़ी पढ़ाई की रफ्तार, 10वीं–12वीं की शिक्षा व्यवस्था धराशायी

फरवरी में परीक्षाएँ, पाठ्यक्रम अधूरा; शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी से छात्र भविष्य पर संकट

भोपाल 3 जनवरी 2026। मध्य प्रदेश में 10वीं एवं 12वीं कक्षाओं की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। SIR निर्वाचन कार्य में बड़ी संख्या में विषय शिक्षकों एवं व्याख्याताओं की ड्यूटी लगाए जाने से बीते दो माह से विद्यालयों में नियमित शिक्षण लगभग ठप हो चुका है। वहीं माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा फरवरी 2026 के प्रारंभ में बोर्ड परीक्षाएँ प्रस्तावित किए जाने से छात्रों का पाठ्यक्रम समय पर पूरा होना असंभव होता जा रहा है।
शिक्षक संगठनों ने इसे छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ बताते हुए परीक्षा कार्यक्रम में संशोधन की मांग की है।

सितंबर तक प्रवेश, फिर कैसे पूरा होगा पाठ्यक्रम ?

शिक्षण सत्र 2025–26 में तिमाही परीक्षा तक प्रवेश प्रक्रिया जारी रहने के कारण नियमित पढ़ाई सितंबर माह से पहले प्रारंभ नहीं हो पाती। अशासकीय विद्यालयों के दबाव में शासकीय स्कूलों में भी देरी से प्रवेश होते हैं, जिससे शुरुआत से ही पाठ्यक्रम पिछड़ जाता है। इसके बावजूद फरवरी में परीक्षाएँ तय कर देना छात्रों पर अनावश्यक दबाव बढ़ा रहा है।

मार्च से सत्र, पर शिक्षक मूल्यांकन में व्यस्त

मण्डल परीक्षाओं के बाद अधिकांश शिक्षक मूल्यांकन कार्य में संलग्न रहते हैं। ऐसे में मार्च माह से नए सत्र की घोषणा केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है। परीक्षा परिणाम जारी न होने से छात्र अगली कक्षा में प्रवेश तक नहीं लेते, जिससे शिक्षण कार्य और अधिक प्रभावित होता है।

स्थानीय परीक्षाओं में समय और पैसे की दोहरी मार

संचालनालय स्तर से स्थानीय परीक्षाओं के नाम पर अधिक शुल्क वसूला जा रहा है और दो पालियों में परीक्षाएँ आयोजित होने से कम से कम दो सप्ताह का शिक्षण समय नष्ट हो रहा है। यदि परीक्षाएँ विद्यालय स्तर पर हों तो एक सप्ताह में संपन्न होकर पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है, साथ ही गरीब एवं ग्रामीण पालकों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा।

त्योहारों के बाद परीक्षाओं से टूटा छात्रों का मनोबल

इस सत्र में तिमाही परीक्षा रक्षाबंधन के बाद, छिमाही दीपावली के बाद और प्री-बोर्ड शीतकालीन अवकाश के बाद कराए जाने से छात्रों की तैयारी और मनोवैज्ञानिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ा है। शिक्षक बताते हैं कि लगातार अवकाशों के बाद परीक्षा होने से बच्चों का आत्मविश्वास गिरा है और पढ़ाई में रुचि भी कम हुई है।

भौतिकी में सिर्फ दो दिन का अंतराल, परिणाम पहले ही कमजोर

12वीं भौतिकी विषय में केवल दो दिन का अंतराल रखा गया है, जबकि पिछले वर्षों में प्रश्नपत्रों की कठिनता के कारण इस विषय के परिणाम अपेक्षाकृत कमजोर रहे हैं। शिक्षकों की मांग है कि भौतिकी जैसे विषय में अधिक अंतराल देकर बेहतर तैयारी का अवसर दिया जाए।

चुनाव बनाम शिक्षा: शिक्षक कक्षाओं से बाहर

भारत निर्वाचन आयोग एवं न्यायालय के निर्देशों के बावजूद बड़ी संख्या में 10वीं–12वीं के विषय शिक्षकों को SIR निर्वाचन कार्य में लगाया गया है। इसका परिणाम यह है कि कई स्कूलों में सप्ताहों से नियमित कक्षाएँ नहीं लग पा रहीं। यही नहीं, पहली से आठवीं तक के शिक्षकों को भी BLO कार्य में लगाने से आधारभूत शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

शिक्षक संगठनों ने माध्यमिक शिक्षा मण्डल से मांग की है कि—बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम संशोधित कर तिथियाँ आगे बढ़ाई जाएँ
12वीं भौतिकी में पर्याप्त अंतराल दिया जाए
10वीं–12वीं के विषय शिक्षकों को SIR निर्वाचन कार्य से तत्काल मुक्त किया जाए
छात्रों को पाठ्यक्रम पूर्ण करने हेतु पर्याप्त समय उपलब्ध कराया जाए

छात्रों के भविष्य का बड़ा सवाल है_ एक ओर सीबीएसई की तर्ज पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर परीक्षाओं, चुनावी ड्यूटी और अव्यवस्थित शैक्षणिक कैलेंडर के बीच प्रदेश के छात्र सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो इसका सीधा असर बोर्ड परीक्षा परिणाम और छात्रों के भविष्य पर पड़ना तय है।