मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने की निर्णायक पहल
ग्वालियर। स्वामी विवेकानंद जी की 164वीं जयंती पर कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर में आज “एक राष्ट्र, एक चुनाव” के ‘छात्र- शंखनाद’ का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से ‘राष्ट्र में एक चुनाव’ को लेकर जनमत निर्माण का सुनियोजित अभियान, प्रदेश होते हुए राष्ट्र तक विस्तार का संदेश दिया गया।
लोकतांत्रिक हितों के सरोकार में उठी एक संगठित वैचारिक पहल आज सहसंयोजक गजेंद्र तोमर के नेतृत्व में अब केवल एक शहर या प्रदेश तक सीमित नहीं रह गई है। “एक राष्ट्र, एक चुनाव” के उद्देश्य को लेकर आयोजित यह कार्यक्रम स्पष्ट रूप से जनमत संग्रह और लोकजागरण की दिशा में एक सशक्त कदम के रूप में सामने आया। इस लोकव्यापी अभियान का मूल उद्देश्य देश में बार-बार होने वाले चुनावों से उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता, प्रशासनिक अवरोध और आर्थिक बोझ पर जन-संवाद के माध्यम से राष्ट्रीय सहमति बनाना है।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए जनभागीदारी आवश्यक
मुख्य वक्ता के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने संविधानिक मूल्यों और जनसेवा पर जोर देते हुए कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता की जागरूकता, सहभागिता और संवैधानिक मूल्यों के पालन में निहित है।कहा कि संविधान केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि देश की आत्मा है, जिसे समझना और उसका सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल नीतियाँ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को सही दिशा देने की भी है।उनका यह उद्बोधन उपस्थित जनसमूह के लिए मार्गदर्शक और प्रेरणादायी रहा।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में यह रेखांकित किया कि एक साथ चुनाव न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाते हैं, बल्कि नीति-निर्माण, विकास योजनाओं और प्रशासनिक निरंतरता को भी मजबूती प्रदान करते हैं।
यह अभियान ग्वालियर से प्रारंभ होकर पूरे मध्य प्रदेश और अंततः देशव्यापी जनमत निर्माण की रणनीति के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।
नेतृत्व और भूमिका की स्पष्टता
इस कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि मंचीय संरचना और दायित्व स्पष्ट रूप से परिभाषित रहे—
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ वक्ता ने “एक राष्ट्र- एक चुनाव” को राष्ट्रहित में समय की आवश्यकता बताते हुए इसे लोकतंत्र के सशक्तिकरण से जोड़ा। विशिष्ट अतिथियों ने संवैधानिक, प्रशासनिक और आर्थिक दृष्टिकोण से इस व्यवस्था के दीर्घकालिक लाभों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम अध्यक्ष ने अपने संबोधन में इसे केवल राजनीतिक सुधार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का विषय बताया और नागरिक सहभागिता को इसका मूल आधार बताया।
अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाओं में शामिल वक्ताओं और आयोजकों ने इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की भूमिका में मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, विशिष्ट अतिथियों में मध्य प्रदेश शासन की ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, प्रदेश सहसंयोजक गजेंद्र सिंह तोमर एवं ग्वालियर ग्रामीण के भाजपा जिला अध्यक्ष प्रेम सिंह राजपूत रहे और इस कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजोरिया ने की।
राजनीतिक नहीं, राष्ट्रीय विमर्श
वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह पहल किसी दल विशेष की नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक भविष्य से जुड़ा राष्ट्रीय विमर्श है। बार-बार चुनावों से रुकने वाला विकास, आचार संहिता की बाधाएं और प्रशासनिक संसाधनों की अनावश्यक खपत—इन सभी मुद्दों पर जनसंवाद की आवश्यकता बताई गई।
ग्वालियर में आयोजित यह कार्यक्रम संकेत देता है कि “एक राष्ट्र, एक चुनाव” अब केवल नीति-स्तर की चर्चा नहीं, बल्कि जनता के बीच ले जाया जा रहा संगठित अभियान बन चुका है। यदि यह जनमत इसी प्रकार प्रदेशों से होते हुए राष्ट्रव्यापी समर्थन में परिवर्तित होता है, तो आने वाले समय में भारतीय लोकतंत्र के ढांचे में एक ऐतिहासिक परिवर्तन की नींव यहीं से रखी जाएगी।कार्यक्रम का समापन सकारात्मक संदेश और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति नई प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

कार्यक्रम की महत्वपूर्ण भूमिका में मनीष सिंह चंदीला: संयोजक – ग्वा. ग्रामीण, कृष्णा सांवला: सह-संयोजक- ग्वा, ग्रामीण, गौरव मिश्र: संयोजक- महानगर ग्वा. एवं विवेक पाल: सह-संयोजक महानगर ग्वालियर सहित अन्य कार्यकर्ता रहे।
