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युग क्रांति फिर बना जनता की आवाज, ऊमरी का ‘अवैध’ चेक पोस्ट हटा

डॉ. गोविंद सिंह के कड़े विरोध के बाद प्रशासन-MPRDC को लेना पड़ा फैसला, टोल से चंद दूरी पर वसूली केंद्र बनाने पर उठे थे सवाल

ग्वालियर/ भिंड 10 अगस्त 2026। जनहित में युगक्रांति द्वारा उठाए जा रहे मुद्दे कहीं जांच एजेंसियों के केंद्र पानी तो कहीं सड़क से सदन तक जनता की आवाज बन कर अनेकों बार गूंजे हैं। इस क्रम में भिंड-ऊमरी-गोपालपुरा टोल को लेकर हाल में युग क्रांति द्वारा किए खुलासे आखिरकार फिर जनता की आवाज बन गए।

पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह के कड़े जनविरोध और कार्रवाई की मांग के बाद ऊमरी टोल से कुछ दूरी पर स्थापित किया गया अतिरिक्त ‘अवैध’ चेक पोस्ट हटा दिया गया। इसे टोल व्यवस्था में पारदर्शिता और जनता के अधिकार की दिशा में पहली बड़ी जीत माना जा रहा है।

मामला इसलिए गंभीर था क्योंकि ऊमरी में स्वीकृत टोल प्लाजा के कुछ किलोमीटर बाद ही दूसरा चेक पोस्ट स्थापित किया जा रहा था। इससे यह आशंका पैदा हुई कि टोल से गुजरने वाले वाहनों को दोबारा रोककर शुल्क वसूली का रास्ता बनाया जा सकता है। खासकर ऊमरी-फूप-प्रतापपुर मार्ग से आने-जाने वाले वाहनों को लेकर दोहरी वसूली की आशंका ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया था।

युग क्रांति ने उठाया सवाल, डॉ. गोविंद सिंह ने बुलंद की आवाज

10 जून 2026 के MPRDC पत्र में अतिरिक्त चेक पोस्ट की जरूरत का कारण ट्रैफिक डायवर्जन रोकना और Revenue Leakage रोकना बताया गया था। लेकिन युग क्रांति ने सवाल उठाया कि यदि टोल वसूली के लिए स्वीकृत प्लाजा पहले से मौजूद है तो उससे कुछ किलोमीटर आगे अलग चेक पोस्ट की जरूरत क्यों पड़ी?

इसी मुद्दे को पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने जनहित में गंभीरता से उठाया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। खुलासे से उठी जनता की आवाज और राजनीतिक विरोध के दबाव के बाद आखिरकार वह चेक पोस्ट हटा दिया गया, जिसे लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे थे।

चेक पोस्ट हटा, लेकिन टोल की ‘BOT’ कहानी अभी बाकी

चेक पोस्ट हटना इस विवाद का अंत नहीं है। युग क्रांति पहलेपुरानी खबरें ही “BOT की उलझी कहानी…” और “दस्तावेजों में यूजर फी, जुबान पर BOT” के जरिए सवाल उठा चुकी है कि 11 मई 2026 के Agreement No. 1092/2026 में 24 माह के लिए User Fee Collection का उल्लेख है, जबकि इसे BOT व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है।

अब MPRDC को स्पष्ट करना चाहिए कि ऊमरी टोल की वास्तविक संविदात्मक व्यवस्था क्या है और अतिरिक्त चेक पोस्ट लगाने की जरूरत तथा अधिकार किस आधार पर तय किए गए थे।

फिलहाल इतना जरूर साफ है—युग क्रांति ने सवाल उठाया, जनता ने आवाज बनाई, डॉ. गोविंद सिंह ने उसे मजबूती दी और प्रशासन को ‘अवैध’ चेक पोस्ट हटाना पड़ा। यह जनता की पहली जीत है, लेकिन अब जवाबदेही की बारी है।