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ग्वालियर में बदमाशों के हौसले बुलंद: कहीं वकील पर जानलेवा हमला, तो कहीं रिश्तेदार पर दुकान फूंकने का आरोप

ब्लैक स्कॉर्पियो से पहुंचे 8-10 बदमाशों ने अधिवक्ता आशुतोष दुबे को पीटा, दूसरे मामले में दुकान में आगजनी और घर पहुंचकर गाली-गलौज की शिकायत; पुलिस की कार्रवाई जारी

ग्वालियर। शहर में आपराधिक घटनाओं ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महाराजपुरा थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते रिश्तेदार पर दुकान में आग लगाने और घर पहुंचकर गाली-गलौज करने का आरोप लगा है, वहीं एक अन्य सनसनीखेज घटना में अधिवक्ता आशुतोष दुबे पर ब्लैक स्कॉर्पियो से पहुंचे 8 से 10 बदमाशों ने जानलेवा हमला कर दिया। वकील पर हमले का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।

ब्लैक स्कॉर्पियो से आए बदमाश, अधिवक्ता पर ताबड़तोड़ हमला

ग्वालियर में विवाद अधिवक्ता आशुतोष दुबे पर देर रात हुए हमले में 8 से 10 युवकों के शामिल होने की बात सामने आई है। आरोप है कि बदमाश ब्लैक स्कॉर्पियो से मौके पर पहुंचे और उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। घटना के दौरान पथराव किए जाने की बात भी सामने आई है। हमले में घायल अधिवक्ता को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

वारदात का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। फुटेज के आधार पर हमले में शामिल लोगों और वाहन की पड़ताल की जा रही है। घटना से अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों में आक्रोश है। आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

पुरानी रंजिश में दुकान में आग लगाने का आरोप

दूसरी घटना महाराजपुरा थाना क्षेत्र की है, जहां एक व्यक्ति ने अपने ही रिश्तेदार पर पुरानी रंजिश के चलते देर रात दुकान में आग लगाने का आरोप लगाया है। पीड़ित पक्ष के मुताबिक, आगजनी से उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ। आरोप यह भी है कि अगले दिन सुबह संबंधित व्यक्ति उनके घर पहुंचा और गाली-गलौज करते हुए हंगामा किया।

शिकायत सामने आने के बाद महाराजपुरा थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। आगजनी के कारणों, घटना में संबंधित व्यक्ति की भूमिका और नुकसान से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

दोनों घटनाएं शहर में सुरक्षा व्यवस्था और आपराधिक तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण की जरूरत को रेखांकित करती हैं। एक ओर अधिवक्ता पर हमले के आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी चुनौती है, तो दूसरी ओर आगजनी के मामले में आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। अब देखना होगा कि पुलिस कितनी तेजी से साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर आरोपियों को कानून के कटघरे में खड़ा करती है।