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शस्त्र पूजा के बाद गोलीकांड: आबकारी अधिकारी की पत्नी की मौत, हादसे की थ्योरी पर उठे गंभीर सवाल!

लाइसेंसी बंदूक से चली गोली ने ली जान; आखिर हथियार संभालने में ऐसी चूक कैसे हुई? घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने आने का इंतजार

युग क्रांति। सतना/रीवा। शस्त्र पूजा के बाद लाइसेंसी बंदूक को अलमारी में रखते समय चली गोली ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। सहायक जिला आबकारी अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह (DP Singh) की पत्नी दीपमाला सिंह की गोली लगने से मौत हो गई। प्रारंभिक तौर पर घटना को दुर्घटना बताया जा रहा है, लेकिन गोली चलने की परिस्थितियों और घटनास्थल से जुड़ी जानकारियों ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब निष्पक्ष जांच से सामने आना जरूरी है।

जानकारी के अनुसार, सतना के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित मंदाकिनी विहार कॉलोनी में 21 अक्टूबर को यह घटना हुई थी। शस्त्र पूजा के अगले दिन बंदूक को अलमारी में रखने के दौरान गोली चलने से दीपमाला सिंह के पेट में गोली लगी। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत होने की खबर है।

दुर्घटना कैसे हुई? हथियार की सुरक्षा पर बड़ा सवाल?

लाइसेंसी हथियार रखना केवल अधिकार नहीं, बल्कि एक गंभीर जिम्मेदारी भी है। हथियार को संभालते समय उसकी स्थिति, कारतूस और सुरक्षा संबंधी बुनियादी सावधानियों का पालन अनिवार्य है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर बंदूक से गोली किन परिस्थितियों में चली? क्या हथियार को सुरक्षित करने से पहले उसकी स्थिति की जांच की गई थी? क्या यह महज एक दुर्घटना थी या घटनाक्रम की कोई दूसरी कड़ी भी है, जिसकी पड़ताल आवश्यक है?

देवेंद्र प्रताप सिंह सेना से रिटायर्ड और आबकारी विभाग में अधिकारी हैं। शास्त्र को सुरक्षित रखना एक आम शास्त्रधारी के लिए भी सामान्य स्तर की सावधानी है तो फिर सेना से रिटायर्ड अर्थात एक ट्रेंड इस अधिकारी द्वारा घटित इस घटना को महज एक असावधानी कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी? लिहाजा हथियार के रखरखाव एवं सुरक्षा संबंधी सावधानियों के साथ पूरी घटना को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब जांच के जरिए सामने आना चाहिए।

घटनास्थल के तथ्य भी जांच के दायरे में आएं

सूत्र एवं स्रोतों अनुसार_ घटनास्थल पर लाइसेंसी 12 बोर की डबल बैरल बंदूक मिलने, कमरे में टूटे कांच बिखरे होने और खाली कारतूस का खोखा नहीं मिलने जैसी जानकारियां सामने आई थीं। इन तथ्यों का वास्तविक महत्व फॉरेंसिक जांच और पुलिस की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि गोली किस दिशा से चली, बंदूक की स्थिति क्या थी, फायरिंग के बाद घटनास्थल पर क्या साक्ष्य मिले और क्या घटनाक्रम बयानों तथा वैज्ञानिक जांच से मेल खाता है। हथियार की बैलिस्टिक जांच और घटनास्थल के साक्ष्यों का परीक्षण इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकता है।

हादसा मानकर जांच सीमित न हो, सच्चाई सामने आए

बता दें कि देवेंद्र प्रताप रीवांचल के निवासी हैं इनके दो पुत्रियां हैं, जिनकी शादी कराकर वह निवृत्त हो चुके हैं। पति-पत्नी के आपसी संबंध कैसे रहें यह सबसे महत्वपूर्ण एंगल है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि प्रारंभिक बयान में घटना को दुर्घटना बताया गया, बल्कि यह है कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और क्या उपलब्ध साक्ष्य उस विवरण की पुष्टि करते हैं? यदि पुलिस जांच में कोई विसंगति सामने आती है, तो उसकी भी निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए।

क्या पुलिस ने सभी संभावित पहलुओं की जांच की है? क्या हथियार की फॉरेंसिक जांच और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का मिलान किया गया है? क्या जांच में सामने आए तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब मिलना जरूरी है।

एक महिला की मौत को केवल दुर्घटना बताकर सवालों को अनुत्तरित नहीं छोड़ा जा सकता। साथ ही, फिलहाल बिना प्रमाण किसी पर संदेह या आरोप को तथ्य के रूप में पेश करना भी उचित नहीं है। अब अपेक्षा यही है कि पुलिस निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच के जरिए स्पष्ट करे कि दीपमाला सिंह की जान लेने वाली गोली आखिर किन परिस्थितियों में चली। जांच में किसी पद, प्रभाव या प्रतिष्ठा का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। सच्चाई जो भी हो, वह साक्ष्यों के आधार पर सामने आनी चाहिए। इस पूरे मामले पर युग क्रांति अपनी नजर बनाए हुए हैं।

पड़ताल अभी जारी है ..