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राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में “ईज ऑफ डूईंग बिजनेस कॉन्क्लेव” का हुआ आयोजन

“ईज ऑफ डूईंग बिजनेस कॉन्क्लेव” ग्वालियर के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा, इससे एक्सपोर्ट की संभावनायें बढ़ेंगीं – कलेक्टर श्रीमती चौहान

ग्वालियर 30 जुलाई 2024/ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल और मंशानुसार ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में मंगलवार को ईज ऑफ डूईंग बिजनेस कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस मौके पर नगर निगम आयुक्त श्री हर्ष सिंह, एमपीआईडीसी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री पी के सिन्हा, सीआईआई मध्यप्रदेश स्टेट काउंसिल के चेयरमेन श्री आशीष वैश्य, सीआईआई ग्वालियर जोन के चेयरमेन श्री पुनीत डाबर तथा मध्यप्रदेश चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में अंचल के उद्यमी मौजूद थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने ग्वालियर और चंबल संभाग के सभी जिलों से आए उद्यमियों को बधाई देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार अंचल में औद्योगिक और निवेश की गतिविधियां बढ़ाने के लिये लगातार प्रयासरत है। इसी उद्देश्य से ईज ऑफ डूईंग कॉन्क्लेव का आयोजन शुरू किया गया है, ताकि विकास की महत्वाकांक्षी रणनीति तैयार हो सके। क्योंकि विकसित भारत के दृष्टिकोंण के जरिए देश अपने भविष्य के लिये जो तैयारी कर रहा है उसमें मध्यप्रदेश भी अपना योगदान दे। इस कॉन्क्लेव के माध्यम से ग्वालियर भी उद्योग और निवेश के मामले में नए आयाम छुएगा, ऐसी संभावना और उम्मीद के साथ ही यह आयोजन किया जा रहा है।
श्रीमती चौहान ने यह भी कहा कि कॉन्क्लेव के जरिए एक तरफ जहां उद्यमियों की समस्यायें शासन और प्रशासन तक पहुँच सकेंगीं, वहीं सरकार द्वारा उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के लिये तैयार की गई नीतियां, नवाचार और व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारियों का आदान-प्रदान हो सकेगा। उन्होंने कहा कि ग्वालियर एवं चंबल अंचल में एक्सपोर्ट करने वाले उत्पादों की भरमार है। लेकिन जानकारी के अभाव में यहां के उद्यमी उसे बाहर नहीं भेज पाते हैं। अब इस कॉन्क्लेव के जरिए वे नियम, कायदे, प्रक्रिया और औपचारिकताओं से जुड़ी पूरी जानकारी लेकर घर जायेंगे और उसके आधार पर अपने उत्पाद के निर्यात की रणनीति तैयार करेंगे।
नगर निगम आयुक्त श्री हर्ष सिंह ने कहा कि भारत ने अपने विकास के लिये वर्ष 2047 में विकास की जो रूपरेखा तैयार की है उसमें व्यापार और उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है और विजन 2047 में विकसित भारत की जो कल्पना की गई है उसमें मध्यप्रदेश का भी योगदान होना चाहिए। इसी उद्देश्य से इस कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया है। श्री सिंह ने कहा कि ग्वालियर पहले से भी बड़ा औद्योगिक क्षेत्र रहा है और इस कॉन्क्लेव के जरिए उद्यमियों और शासन के बीच एक सकारात्मक बातचीत का सिलसिला शुरू होगा, ताकि एक बार फिर यहां औद्योगिक और व्यवसायिक गतिविधियां आगे बढ़ सकेंगीं।
एमपीआईडीसी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री मृदुल सिन्हा ने बताया कि ग्वालियर में आयोजित किए गए इस ईज ऑफ डूईंग बिजनेस कॉन्क्लेव में न केवल ग्वालियर बल्कि आसपास के जिलों के भी उद्यमी और निदेशकों ने उत्साह के साथ भाग लिया। साथ ही अलग-अलग विभागो द्वारा यहां अपना प्रजेंटेशन दिया गया। जिसमें बताया गया कि उनके जरिए उद्यमी किस तरह अपने बिजनेस को सरल ढंग से स्थापित कर और आगे बढ़ा सकते हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताया गया कि सरकार की इस मामले को लेकर भविष्य की प्लानिंग क्या है। इस मौके पर उद्यमियों ने तमाम तरह के सवाल भी उठाए और शंकायें भी जाहिर कीं। कॉन्क्लेव में उपस्थित विशेषज्ञों द्वारा उनकी जिज्ञासाओं, समस्याओं और शंकाओं का समाधान भी किया गया। इस आयोजन के जरिए उद्यमियों को यह भरोसा दिलाया गया कि सरकार लगातार उद्योग और व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिये प्रयासरत है।
सीआईआई मध्यप्रदेश स्टेट काउंसिल के चेयरमेन श्री आशीष वैश्य ने बताया कि ईज ऑफ डूईंग बिजनेस इंडेक्स एक ग्लोबल इंडेक्स है। इसके आधार पर निर्धारित होता है कि किस देश, कस प्रदेश और किस शहर में कितना निवेश आयेगा। आज की वर्तमान स्थिति में ईज ऑफ डूईंग बिजनेस इंडेक्स में मध्यप्रदेश भारत में चौथे स्थान पर आ गया है। हम गुजरात और महाराष्ट्र से भी आगे जा चुके हैं। हमारी पॉलिसी इंडिया में सबसे प्रो एक्टिव पॉलिसी में आती है, लेकिन समस्या यह आती है कि एक तरफ पॉलिसी बनना और दूसरी तरफ तत्काल उद्योगपतियों को इसकी जानकारी देना तथा उद्योगपतियों के ग्राउण्ड लेवल पर क्या ईश्यूज हैं इसकी जानकारी सरकार तक पहुँचना । उद्योगपतियों को सूचनाओं की जानकारी नहीं है, इसलिए वे अपने उद्योगो का विकास नहीं कर पाते हैं।
श्री वैश्य ने बताया कि अगर हम मध्यप्रदेश या ग्वालियर के व्यापार की बात करें तो हम डॉमेस्टिक आईटम ज्यादा बनाते हैं, एक्सपोर्ट के लिये कम बनाते हैं। जबकि हमारे यहां एक्सपोर्ट का प्रोटेंशियल उतना है जितना गुजरात में है। आज के इस कॉन्क्लेव के जरिए अंचल के उद्यमियों को यह जानकारी दी गई कि वे कैसे अपने उद्योग और व्यापार के उत्पादों के जरिए एक्सपोर्ट को बढ़ावा दे सकते हैं। इसके लिये शासन की क्या योजनायें हैं, क्या नियम हैं और उन्हें क्या सुविधायें प्रदान की जाती हैं जैसी सभी जानकारियां इसमें एक ही मंच पर उपलब्ध कराई गईं।
इस कॉन्क्लेव में भाग लेने बड़ी संख्या में पहुँचे उद्यमियों ने अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी समस्याओं के बारे में भी बताया। यहां मौजूद विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने उन्हें नोट भी किया और समाधान करने का प्रयास भी किया।
कॉन्क्लेव के विभिन्न सत्रों में एमपीआईडीसी के डायरेक्टर श्री आदर्श नायक ने सिंगल विंडो सिस्टम, भारत सरकार के जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड के ज्वाइंट डायरेक्टर श्री सुविध शाह ने निर्यात संबंधी, एमएसएमई मध्यप्रदेश के ज्वाइंट डायरेक्टर श्री पंकज दुबे ने एमएसएमई से जुड़ी योजनाओं, मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लमिटेड के सीजीएम श्री शैलेन्द्र सक्सेना ने ऊर्जा से संबंधित प्रजेण्टेशन और जानकारियां दीं। इनके अलावा द्वितीय सत्र में विशेषज्ञ श्री अंकुर माहेश्वरी ने पर्यावरण, श्रम और अर्बन डवलपमेंट से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी। मध्यप्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के टेक्नीकल एडवाइजर श्री आर के गुप्ता ने प्रदूषण से जुड़े विषयों तथा असिस्टेंट लेबर कमिश्नर श्रीमती संध्या सिंह ने श्रम विभाग से संबंधित नियमों की जानकारी दी। इसके साथ ही मध्यप्रदेश शासन के शहरी विकास एवं आवास विभाग के डिप्टी डायरेक्टर श्री देवेन्द्र व्यास ने भी व्याख्यान दिया। इसके बाद फूड, सिविल सप्लाई और कंज्यूमर प्रोटेक्शन और मिनरल रिसोर्स को लेकर सत्र हुआ। जिसमें नापतौल विभाग के डिप्टी कंट्रोलर श्री राजेश पिल्लै ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। सभी सत्रों में विशेषज्ञों के व्याख्यान के बाद विशेषज्ञों द्वारा उद्यमियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए।

उद्यमियों को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी

ईज ऑफ डूईंग बिजनेस कॉन्क्लेव के दौरान उद्योग और व्यवसाय से जुड़े विभिन्न विभागों द्वारा उद्यमियों को सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं और की गई व्यवस्थाओं को लेकर सिलसिलेवार जानकारी दी गई। श्रम विभाग की ओर से बताया गया कि श्रम संबंधी विवादों के समाधान के लिये देश की पहली श्रम न्यायालय केस प्रबंधन प्रणाली मध्यप्रदेश में ही शुरू की गई है। जबकि पीसीबी से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि विभाग अपनी ऑनलाइन प्रणाली में सुधार कर रहा है और स्वचालित सत्यापन फॉर्म, ई-मीट आदि जैसी सुविधाओं के साथ एक उन्नत संस्करण के भी लाँच करने की प्रक्रिया चल रही है। इस अवसर पर यह भी बताया गया कि उद्योगों की 400 नई श्रेणियों को श्वेत श्रेणी में शामिल कर अब इनकी कुल संख्या 751 कर दी गई है। इससे इनको विभाग से सहमति लेने में छूट मिलेगी।
यूएडीडी योजना के तहत उद्यमियों को बताया गया कि फायर एनओसी संबंधी मंजूरियों के त्वरित समाधान के लिये राज्य में एक समर्पित निदेशालय स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा फायर एनओसी प्राप्त करने के लिये दिशा-निर्देशों की रूपरेखा तैयार करने के लिये एक नया अधिनियम तैयार किया जा रहा है। कॉन्क्लेव में यह भी बताया गया कि अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र लेने के लिये उद्योग विभाग को और और बिल्डिंग परमिट के लिये शक्तियों का प्रत्यायोजन औद्योगिक विभाग के कार्यकारी निदेशक को किया जा रहा है। इसमें ईडी को परिषद / समिति की आवश्यकता को समाप्त करते हुए बिल्डिंग परमिट देने का अधिकार होगा।
कॉन्क्लेव में यह भी बताया गया कि सरकार एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिये कृत संकल्पित है और इस दिशा में अनेक सार्थक कदम उठाए गए हैं। एमएसएमई को प्रोत्साहन देने के लिये तथा इसकी गति को तेज और पारदर्शी करने के लिये विभाग शीघ्र ही लाभार्थियों के लिये प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) का प्रावधान शुरू करने जा रहा है। कॉन्क्लेव में जानकारी दी गई कि राज्य में उद्योग स्थापित करने तथा इन्वेस्ट को बढ़ाने के लिये डीआईपीआईपी के अंतर्गत एक समर्पित सिंगल विंडो सिस्टम अर्थात इन्वेस्ट पोर्टल तैयार किया गया है। इस पोर्टल में 13 विभागों की 47 सेवाओं को एक जगह एकीकृत किया गया है। इस प्रणाली को भारत सरकार द्वारा विकसित की गई नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (एनएसडब्ल्यूएस) और इंडिया इंडस्ट्रीयल लैंड बैंक (आईआईएलबी) के साथ भी एकीकृत किया गया है। साथ ही भूमि को जीआईएस आधारित भूमि आवंटन प्रणाली के माध्यम से बुक किया जा सकता है, जिसे भारत सरकार द्वारा देश में अग्रणी प्रथाओं में से एक के रूप में पहचाना गया है। विभाग ने निवेशकों को अनुमोदन एनओसी और प्रोत्साहन आदि जैसी सेवाओं का लाभ उठाने के लिये एसडब्ल्यूएस का लाभ उठाने के लिये भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उद्यमियों को जानकारी दी गई कि उत्पाद शुल्क विभाग ने मंजूरी/एनओसी जारी करने के लिये ई-आबकारी पोर्टल के माध्यम से प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया है। विभाग ने जरूरत के अनुसार ऑटो नवीनीकरण का प्रावधान भी शुरू किया है। साथ ही जीएसटी, वेट, और प्रोफेशनल टैक्स पंजीकरण के लिये डीम्ड अनुमोदन करने का प्रावधान भी शुरू कर दिया है। इस मौके पर ऊर्जा विभाग द्वारा बताया गया कि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में हरित ऊर्जा शुल्क को 1.13 रूपए/किलोवाट से घटाकर वर्ष 2023-24 में 0.97 रूपए / किलोवाट कर दिया है। इसी तरह विदेश व्यापार महानिदेशालय द्वारा जानकारी दी गई कि उत्पादों के निर्यात और आयात के लिये अब किसी भी लायसेंस की आवश्यकता नहीं है। निर्यातकों के लिए बाजार पहुँच में सुधार के लिये भारत सरकार प्रामुख ई-कॉमर्स वेबसाइटों जैसे एमेजोन, ईवे, फ्लिपकार्ट और वॉलमार्ट आदि पर उत्पादों को बिना किसी शुल्क के सूचीबद्ध करने की सुविधा प्रदान की जायेगी। साथ ही एफएसीएस विभाग ने एमपी डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से अपनी सभी सेवाओं को डिजिटल कर दिया है। विभाग ने सेवाओं की समय पर डिलेवरी सुनिश्चित करने के लिये पीएसजी अधिनियम के तहत 21 सेवाओं को अधिसूचित किया है। कॉन्क्लेव में खनिज विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि विभाग ई-खनिज 2.0 विकसित कर रहा है, जो विस्तृत खनिज जानकारी, परमिट आवेदन और खनन विभाग एवं कंपनियों एवं नियामक निकायों के बीच बेहतर सहयोग करने वाले एक व्यापक मंच के रूप में काम करेगा।