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पांडित्य धर्म अगर खत्म हो गया तो दुनिया में कुछ नहीं बचेगा-कौशिक महाराज

भोजन व भजन ठीक कर लो, बाकी भगवन ठीक कर देंगे..
शिवलोक फूलबाग में शिवमहापुराण, आज होगी शिव के 112 अवतारों की कथा..

ग्वालियर। भोजन यदि सात्विक और सुपाच्य होगा तो भजन में भी मन लगेगा, जिसने अपना भोजन एवं भजन ठीक कर लिया, उसका जीवन भगवान स्वयं संवार देंगे। यह विचार कौशिक महाराज ने फूलबाग शिवलोक धाम में आयोजित हो रही शिवमहापुराण कथा केे सांतवे दिन बुधवार को व्यक्त किए। गुरूवार को भगवान शिव के 112 अवतारों की कथा होगी तथा शुक्रवार को 12 ज्योतिर्लिगों का वर्णन किया जाएगा। 23 मई को कथा दोपहर 12 बजे से शुरू होगी ।
कौशिक जी महाराज ने कहा कि भगवान का भजन करते हुए आनंदपूर्वक भोजन बनाएं और जब परिवार के सदस्य उसे शांतिपूर्ण ढंग से ग्रहण करेंगे तो वह अमृत के समान गुणकारी हो जाएगा,इसलिए भोजन करते समय पति से न लड़ें। हाथ-पैर धोकर कुल्ला करने के बाद ही भोजन करें। उन्होंने बताया कि शिव-पार्वती का विवाह संसार का पहला विवाह था, जिसे  सभी सनातनी आदर्श मानते हैं, लेकिन आजकल विवाह में जिस तरह के भोज होते हैं, तो लगता है कि सारे भूखें इक्ट्ठे  हो गए हैं। चाट के स्टॉलों पर ऐसे टूटते हैं जैसे भोजन करने नहीं आयोजक की व्यवस्था बिगाडऩे गए हों।

 कन्यादान सबसे बड़ा दान

उन्होंने कहा कि कन्यादान से बड़ा कोई पुण्यफल नहीं हैंऔर न इससे बड़ा कोई दान हे। एक बेटी का कन्यादान करने से हजार यज्ञ का फल मिलता है। कम से कम 24 घंटे निराहार रहकर प्रसन्नतापूर्वक कन्यादान करें। वो माता-पिता भाग्यशाली जिन्हेें अपने घर से बेटी की विदाई का अवसर मिलता है,लेकिन आजकल तो मैेरिज गार्डन और होटलों से विदाई होने लगी हैं, ये
नकली परंपराएं ज्यादा दिन नहीं टिकेंगी और लोग फिर से अपनी संस्कृति की ओर लौटेंगे। उन्होंने कहा कि कन्यादान के समय रोना नहीं चाहिए ।

दबाव में न करें बेटी का संबध

कौशिक जी महाराज ने  कहा कि जिस तरह हर किसी को गौदान नहीं किया जाता है, इसी तरह हर किसी को कन्यादान भी नहीं किया जाता है। बेटी के लिए वर सवा गुना धनवान तो देखें, लेकिन दस गुना धनी न देखें, ऐसा करने से बेटी दुखी रहेगी। धन के साथ लड़के वालों को व्यवहार भी देखें। किसी पारिवारिक ओर नाते ,रिश्तेदारों  के दबाव में अपनी बेटी का संबध नहीं करें।

सबसे मुश्किल होती है बेटी की विदाई

उन्होंने कहा कि बेटी जब पैदा होती है तो इसका दुःख नहीं होता कि उसके विवाह के लिए दहेज कैसे जुटाएंगे, बल्कि इस बात से बेटी के बड़ी होने पर माता पिता परेशान होने लगते हैं कि बेटी घर छोड़कर चली जाएगी। बेटी की विदाई करना संसार का सबसे मुश्किल काम है।

दक्षिणा में कंजूसी न करें
उन्होंने कहा कि आजकल शादी समारोह को भव्य बनाने के लिए लोग पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं,लेकिन विवाह की पवित्र रस्में कराने वाले पुरोहित की दक्षिणा में कंजूसी करते हैं। पहले पंडित की दक्षिणा  भी चार लोग चर्चा कर तय करते थे। जिससे पांडित्य कर्म में कमी आ रही है, पांडित्य कर्म खत्म हो गया तो कुछ नहीं बचेगा।

शराब छुड़ा देगी अदरक की टॉफी

कौशिक जी महाराज ने  कहा कि आजकल तो शादियों में शराब के काउंटर भी लगने लगे हैं,जिनके माता पिता सुपारी नहीं खाते, उनके लड़के शराब से कुल्ला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सल्फर की कमी से नशे की लत लग जाती है। अदरक, लहसुन, प्याज और पत्तागोभी खाने से सल्फर की पूर्ति होती है। अदरक पर नींबू काला नमक डालकर सुखा लें और शराब की तलब लगने पर टॉफी की तरह मुंह में चूसे, फिर शराब पीने का मन नहीं करेगा।

 नौतपा में न खाएं कटहल ओर बैंगन

25 मई से 2 जून तक नौतपा की भीषण गर्मी पड़ेगी। इस दौरान कटहल और बैंगन जैसी गर्म सब्जियां न खाएं। सतुआ और बेल फल का अधिक सेवन करें। हनुमानजी को चोला चढ़ाएं। वरुणदेव की पूजा करें,जिससे खूब वर्षा होगी। कथा में उमड़ रही श्रोताओं की भीड़ ने भजनों पर जमकर नृत्य कर माहौल को आनंदित बना दिया ।
यह तीन व्यक्ति बिना स्वार्थ के सेवा करते हैं


कौशिक जी महाराज ने कहा कि हमें एक दूसरे का आदर करना चाहिए और तीन व्यक्ति हैं जिसमें शिष्य, बेटा ओर पत्नी । यह तीनों बिना स्वार्थ के सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की पवित्रता से ही यह दुनिया टिकी है। उन्हें अपने धर्म का पालन करना चाहिए। गलत रास्ते पर चलने वाली महिलाओं का पिता, मामा ओर पति के घर की बर्बादी का कारण बनता है।पति के बिना पत्नी सुखी स्त्री के सामान होती है।
इस मौैके पर आदित्य सिंह सिकरवार गोंची ने कथा व्यास पीठ की पूजा कर आरती की।  कथा परीक्षत सरिता नरेंद्र शर्मा, मनीष शर्मा, कंचनमणि शर्मा, पं रामदेव शास्त्री, रामबाबू अग्रवाल, उमेश उप्पल सहित हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।