भोपाल। मध्यप्रदेश भवन विकास निगम (MPBDC) में 126 नियुक्तियों को लेकर उठे विवाद के बीच अब एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। यह युग क्रांति में कल प्रकाशित खबर “MPBDC में 126 नियुक्तियां विवादों के घेरे में, क्या नियमों से पहले बांट दी गई थीं नौकरियां!” का संशोधित वर्जन है। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और जानकारी के अनुसार, जिन 198 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी, उनकी स्वीकृति MPBDC के योजना मंडल से नहीं बल्कि MPRDC के योजना मंडल के अनुमोदन के आधार पर प्राप्त हुई थी।
दरअसल, 7 जनवरी 2022 को लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी आदेश के माध्यम से MPBDC के गठन का निर्णय लिया गया था। उस समय MPBDC का न तो योजना मंडल गठित हुआ था और न ही निगम पूर्ण रूप से अस्तित्व में आया था। शासन ने आदेश में स्पष्ट किया था कि जब तक नवगठित MPBDC पूर्ण रूप से क्रियाशील नहीं हो जाता, तब तक भवन निर्माण कार्यों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी MPRDC निभाएगा।
इसी व्यवस्था के तहत MPRDC को कार्यकारी एजेंसी के रूप में अधिकृत किया गया और निगम के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए 198 पदों की संरचना स्वीकृत की गई। विभागीय पक्ष के अनुसार इन पदों पर भर्ती, प्रतिनियुक्ति और संविदा संबंधी कार्रवाई MPRDC के योजना मंडल के अनुमोदन के आधार पर प्रारंभ की गई थी। यह 126 नियुक्तियां इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
उल्लेखनीय है कि MPBDC के योजना मंडल का गठन 21 फरवरी 2022 को हुआ, जबकि पदों की स्वीकृति और भर्ती संबंधी प्रारंभिक कार्रवाई इससे पहले ही शुरू हो चुकी थी। ऐसे में विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन पदों को MPBDC के योजना मंडल की स्वीकृति से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। विभागीय पक्ष का कहना है कि पदों की स्वीकृति और भर्ती प्रक्रिया शासन के आदेश तथा MPRDC के योजना मंडल के अनुमोदन के अनुरूप की गई थी।
