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PWD में सप्लीमेंट्री वर्क घोटाले की आंच पहुंची बड़े अफसरों तक!

9 इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस, अभियंता प्रमुख के जवाब ने बढ़ाए नए सवाल

भोपाल/ग्वालियर_ युग क्रांति विशेष। लोक निर्माण विभाग (PWD) में वर्षों से सप्लीमेंट्री वर्क के नाम पर लागत बढ़ाकर सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ डालने वाले खेल पर अब सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। वर्ष 2024 से 2026 के ममलों में विभागीय जांच में चौंकाने वाले खुलासों के बाद नौ इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही विभाग ने 8 जुलाई 2026 को एक विस्तृत आदेश जारी कर सप्लीमेंट्री कार्य, ठेकेदारों के भुगतान, परफॉर्मेंस गारंटी, समय-वृद्धि (EOT) और आंतरिक ऑडिट पर सख्त नियंत्रण लागू कर दिया है।

विभागीय जांच में 143 प्रतिशत तक सप्लीमेंट्री कार्य स्वीकृत करने जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं और नौ इंजीनियरों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की गई है।

इन अधिकारियों के नाम सामने आने की चर्चा

विभागीय सूत्रों के अनुसार कारण बताओ नोटिस पाने वालों में मुख्य रूप से नौगांव के तत्कालीन प्रभारी अधीक्षण यंत्री आरके.हनुमंते, एनपी सिंह, टीकमगढ़ के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री आरके/ आरऐ विश्वकर्मा/ एनके बाथम एवं आईके शुक्ला और कुछ एसडीओ शामिल बताए जा रहे हैं।

हालांकि विभाग ने अब तक आधिकारिक रूप से नोटिस प्राप्त अधिकारियों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की है।

क्या अभियंता प्रमुख का नाम दबा दिया गया?

जांच में सागर संभाग का मामला सबसे गंभीर बताया गया ले लिहाजा इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल तत्कालीन सागर मुख्य अभियंता एवं वर्तमान अभियंता प्रमुख आर.एल. वर्मा को लेकर उठ रहा है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि जांच में उनका नाम भी चर्चा में था, लेकिन प्रभाव का इस्तेमाल कर उनका नाम कार्रवाई से बाहर रख दिया गया। हालांकि अब तक इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इसी बीच युग क्रांति के संपादक बृजराज सिंह तोमर ने अभियंता प्रमुख आर.एल. वर्मा से सीधे पूछा कि जांच के बाद किन-किन इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।इस पर उनका जवाब था—

“अभी मेरे पास जांच रिपोर्ट आई नहीं है, आ जाएगी तो बता दूंगा।”

इसके तुरंत बाद उन्होंने फोन काट दिया। यह जवाब इसलिए कई सवाल खड़े करता है क्योंकि विभागीय सूत्रों के अनुसार उस समय तक संबंधित इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके थे।

सरकार का नया आदेश बताता है कि गड़बड़ी कितनी गहरी थी

8 जुलाई 2026 को जारी लोक निर्माण विभाग के आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि—

  • सप्लीमेंट्री कार्यों का भुगतान निर्धारित नियमों के अनुसार ही होगा।
  • ठेकेदारों का भुगतान “फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व” के आधार पर होगा।
  • Performance Guarantee लौटाने से पहले सड़क की Roughness Index (IRI) जांच अनिवार्य होगी।
  • समय-वृद्धि (EOT) और पेनाल्टी की समीक्षा होगी।
  • प्रत्येक संभाग का नियमित आंतरिक ऑडिट कराया जाएगा।
  • निरीक्षण दल गठित कर हर माह रिपोर्ट ली जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी व्यापक व्यवस्था तभी लागू की जाती है जब विभाग को बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका हो।

क्या पूरे प्रदेश में फैला है सप्लीमेंट्री वर्क का खेल?

विभागीय सूत्रों का दावा है कि सप्लीमेंट्री शेड्यूल के माध्यम से लागत बढ़ाने का खेल केवल एक-दो संभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश के अधिकांश संभागों और सर्किलों तक फैल चुका है। ऐसा प्रतीत होता है कि हरेक संभाग और सर्कल स्तर पर ऊपर से टारगेट निर्धारित किया गया है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि विभागीय मंत्री के कथित दो शागिर्दों और ग्वालियर सर्किल के एक प्रभावशाली अधिकारी की सक्रियता बढ़ने के बाद इस प्रकार के मामलों में तेजी आई। युग क्रांति इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता, लेकिन यदि जांच निष्पक्ष हुई तो कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल

यदि जांच पूरी हो चुकी थी और कारण बताओ नोटिस भी जारी हो चुके थे, तो—

  • क्या विभाग के सभी जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी थी?
  • यदि थी, तो अभियंता प्रमुख ने जांच रिपोर्ट न मिलने की बात क्यों कही?
  • क्या सभी दोषियों पर समान कार्रवाई होगी या केवल अधीनस्थ अधिकारी ही निशाने पर रहेंगे?
  • क्या सरकार पूरे प्रदेश में सप्लीमेंट्री वर्क की विशेष ऑडिट कराएगी?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में लोक निर्माण विभाग की पारदर्शिता और सरकार की मंशा दोनों की परीक्षा लेंगे।