क्या अफसरों को हाईकोर्ट की रोक का इंतजार?
भोपाल 10 जुलाई 2026। मध्यप्रदेश में करीब एक दशक से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया को गति देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी विभागों को शीघ्र प्रमोशन सूची जारी करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इन निर्देशों पर तेजी से अमल करते हुए 193 तहसीलदारों को डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नत कर दिया है। इसके अलावा भी विभिन्न विभागों में लगातार पदोन्नति सूचियां जारी हो रही हैं।
लेकिन दूसरी ओर वाणिज्यिक कर (GST) विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। विभाग अब तक अधिकारियों के किसी भी प्रमुख कैडर की पदोन्नति सूची जारी नहीं कर पाया है। केवल कुछ लिपिकीय कर्मचारियों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सीमित पदोन्नति सूची जारी होने के बाद पूरी प्रक्रिया लगभग ठहरी हुई नजर आ रही है।
DC से लेकर कर सहायक तक सैकड़ो अधिकारियों व कर्मचारियों को इंतजार
विभाग में डिप्टी कमिश्नर (DC), असिस्टेंट कमिश्नर (AC), कमर्शियल टैक्स ऑफिसर (CTO), असिस्टेंट कमर्शियल टैक्स ऑफिसर (ACTO), कमर्शियल टैक्स इंस्पेक्टर (CTI) तथा कर सहायक सहित कई संवर्गों के अधिकारी-कर्मचारी लंबे समय से पदोन्नति की राह देख रहे हैं। विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारियों का कहना है कि अन्य विभाग जहां लोक सेवा आयोग के समक्ष प्रस्ताव भेजकर प्रक्रिया आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं GST विभाग अभी तक ठोस निर्णय लेने की स्थिति में भी दिखाई नहीं दे रहा।
विभागीय कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि आखिर इतनी सुस्ती की वजह क्या है? सवाल उठ रहे हैं कि क्या मुख्यालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारी पदोन्नति प्रक्रिया को जानबूझकर टाल रहे हैं? क्या उन्हें इस बात का इंतजार है कि भविष्य में न्यायालय से कोई रोक लग जाए और पदोन्नति सूची जारी करने की जिम्मेदारी से बचा जा सके? हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
मुख्यमंत्री ने दिए हैं स्पष्ट निर्देश, फिर भी टालम टोल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में स्पष्ट कहा है कि वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को हर हाल में तेजी से पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि पदोन्नति से संबंधित पूरा डेटा ऑनलाइन अपलोड किया जाए तथा 9 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। हाईकोर्ट ने भी फिलहाल नई पदोन्नति प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है, जिससे सरकार को प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता मिल गया है।
युवाओं के रोजगार से भी जुड़ा है मामला मानते हुए मुख्यमंत्री डॉ यादव ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ अधिकारियों की पदोन्नति होने से निचले पद रिक्त होंगे और इससे राज्य में नई भर्ती का रास्ता खुलेगा। ऐसे में यदि कोई विभाग पदोन्नति प्रक्रिया में अनावश्यक देरी करता है तो उसका असर केवल वर्तमान कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के रोजगार अवसरों पर भी पड़ सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अधिकांश विभाग पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी दिखा रहे हैं, तब मध्यप्रदेश का वाणिज्यिक कर (GST) विभाग आखिर किस बात का इंतजार कर रहा है? क्या मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन यहां प्राथमिकता नहीं है, या फिर प्रशासनिक उदासीनता पदोन्नति प्रक्रिया पर भारी पड़ रही है?
