महीनों की तैयारी पर फिरा पानी, संगठन के भरोसे भाजपा ने खेला नया राजनीतिक दांव
ग्वालियर/दतिया 10 जुलाई 2026। लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इसके साथ ही प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की चुनाव लड़ने की उम्मीदों पर पूर्ण विराम लग गया। पिछले दो-तीन महीनों से डॉ. मिश्रा लगातार दतिया में जनसंपर्क, कार्यकर्ता बैठकों और घर-घर संपर्क अभियान में सक्रिय थे, जिससे उन्हें टिकट का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था।
भाजपा के इस फैसले को प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। संगठन ने ऐसे नेता पर भरोसा जताया है, जो लंबे समय तक संगठन मंत्री सहित विभिन्न सांगठनिक दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं और जिनकी पहचान अपेक्षाकृत शांत एवं संगठननिष्ठ कार्यकर्ता के रूप में रही है।
टिकट कटने के पीछे क्या रही वजह?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट केवल स्थानीय समीकरणों का परिणाम नहीं है। पार्टी के भीतर लंबे समय से उनकी कार्यशैली को लेकर असंतोष की चर्चाएं होती रही हैं। शिवराज सिंह चौहान सरकार के कार्यकाल में संगठन और सत्ता के बीच समन्वय को लेकर भी कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं सामने आई थीं। हालांकि, भाजपा ने टिकट वितरण के संबंध में किसी प्रकार का आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती।
समर्थकों में मायूसी, कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद
डॉ. मिश्रा के समर्थकों में टिकट कटने से निराशा का माहौल देखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर पार्टी के अनेक कार्यकर्ता और राजनीतिक विश्लेषक इसे संगठन आधारित राजनीति को प्राथमिकता देने वाला निर्णय मान रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि चुनाव में संगठन, अनुशासन और कार्यकर्ता आधारित नेतृत्व को महत्व दिया जाएगा।
दतिया उपचुनाव अब केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन चुका है। ऐसे में आशुतोष तिवारी की उम्मीदवारी से चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है। अब सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि भाजपा संगठन की रणनीति और नए चेहरे के सहारे सीट बरकरार रख पाती है या नहीं।
