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अखिलेश का ‘मोहन प्रेम’ क्यों? उज्जैन भूमि विवाद में सपा-भाजपा रिश्तों पर उठे नए सवाल

भोपाल/उज्जैन। उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में कथित तौर पर सैकड़ों एकड़ जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर मचे राजनीतिक बवंडर के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समर्थन में उतरने से देशभर में नई राजनीतिक बहस पैदा हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिस मुद्दे पर विपक्ष सरकार को घेर रहा है, उसी मुद्दे पर विपक्ष का एक बड़ा चेहरा भाजपा मुख्यमंत्री के बचाव में क्यों खड़ा दिखाई दे रहा है?

अखिलेश यादव ने डॉ. मोहन यादव पर लगे आरोपों को भाजपा के भीतर की साजिश बताते हुए कहा कि उन्हें पद से हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति पहले से रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा रहा है तो जमीन खरीदने में असामान्य क्या है?

कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर

लेकिन अखिलेश के इस बयान ने विवाद को शांत करने के बजाय और गहरा कर दिया। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सीधे पलटवार करते हुए ऐसे रिश्तों और नामों का जिक्र किया जिसने पूरे मामले को नया राजनीतिक आयाम दे दिया। राजभर ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भरत यादव, जो वर्तमान में एमपीआरडीसी के प्रबंध संचालक हैं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के करीबी माने जाते हैं, उनका संबंध समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता चंद्रपाल यादव से है। चंद्रपाल यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं और विधायक से लेकर लोकसभा एवं राज्यसभा तक का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। भरत यादव उनके दामाद बताए जाते हैं।

राजभर का आरोप है कि यही पारिवारिक और राजनीतिक समीकरण अखिलेश यादव की असामान्य सक्रियता और मुख्यमंत्री मोहन यादव के प्रति उनके समर्थन का कारण हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि जमीन निवेश और उससे जुड़े हितों के कारण अखिलेश यादव इस मामले में आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाने के बजाय बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। इनके आरोपों में सड़क विकास निगम mpbdc के प्रबंध निदेशक (MD) कि अहम किरदारी बताई गई है।

ससुर दामादहालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही अब तक किसी जांच एजेंसी ने ऐसे किसी संबंध या लाभ के दावे को प्रमाणित किया है। संबंधित पक्षों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के प्रयासों में भी स्पष्ट जवाब सामने नहीं आ सका। इस मामले में भरत यादव भी जवाब देने की उपलब्धता से बचते रहे।

सबसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न यह है कि उत्तर प्रदेश में जहां भाजपा और समाजवादी पार्टी एक-दूसरे के सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मामले में अखिलेश यादव का रुख समर्थक जैसा क्यों दिखाई दे रहा है? क्या यह सिर्फ राजनीतिक और जातिगत शिष्टाचार है या फिर इसके पीछे कोई गहरे रिश्ते और हित जुड़े हुए हैं?

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान यादव बाहुल्य क्षेत्रों में भाजपा ने डॉ. मोहन यादव को प्रमुख प्रचारक के रूप में उतारा था लेकिन सार्थक और संतोषजनक परिणाम नहीं आए। उस समय भी उनके उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं हुई थीं। आज तक यह आम चर्चा होती है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की कार्यशैली में तभी से अखिलेश की झलक दिखती है! अब उज्जैन भूमि विवाद के बीच अखिलेश यादव का खुला समर्थन उन चर्चाओं को फिर हवा दे रहा है।

उज्जैन भूमि प्रकरण में जांच और पारदर्शिता की मांग तेज होती जा रही है। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि आखिर विपक्ष का एक बड़ा नेता भाजपा के मुख्यमंत्री के बचाव में क्यों खड़ा है? क्या यह महज संयोग है या फिर राजनीति के पर्दे के पीछे कोई ऐसा गठजोड़ है, जिसकी परतें अभी खुलना बाकी हैं?