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मुख्यमंत्री के मौन ने सवालों को और बड़ा किया, जवाब अभी भी बाकी : जीतू पटवारी

भोपाल, 26 जून 2026। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी ने आज प्रदेश की जनता के नाम एक खुला पत्र जारी करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों से मध्य प्रदेश राजनीतिक विवाद के साथ सार्वजनिक जवाबदेही की परीक्षा का साक्षी बन रहा है! एक राष्ट्रीय समाचार पत्र द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के बाद पूरे प्रदेश में गंभीर चर्चा शुरू हुई है। विपक्ष ने तथ्यात्मक प्रश्न उठाए, पत्रकारों ने सवाल पूछे, फिर राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस खड़ी हुई, कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, दिल्ली में भी इस विषय को उठाया गया! डरे हुए थके जवाब में राज्य सरकार के कई मंत्रियों ने अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री का बचाव किया। लेकिन, मध्य प्रदेश की छवि को पूरे देश में खराब करने वाले इस शर्मनाक घटनाक्रम के बीच एक बात सबसे अधिक ध्यान आकर्षित कर रही है, पूरे विवाद के केंद्र में मौजूद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अब भी “मौन” हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का सबसे बड़ा कवच प्रचार नहीं, बल्कि पारदर्शिता होती है। यदि किसी राष्ट्रीय मीडिया संस्थान की रिपोर्ट पूरी तरह तथ्यहीन है, तो लोकतांत्रिक और कानूनी व्यवस्था स्पष्ट रास्ता देती है, तथ्यों के साथ सामने आइए या न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाइए! लेकिन, यदि लगातार केवल मंत्री बोलें, प्रवक्ता बोलें और संगठन बोलता रहे और मुख्यमंत्री स्वयं सार्वजनिक प्रश्नों पर मौन रहें, तो स्वाभाविक रूप से जनता के मन में जिज्ञासा और बढ़ती है!

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने अब बहस का केंद्र बदल दिया है। अब प्रश्न भूमि या दस्तावेज़ों का भी है कि क्या मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री अपने ऊपर उठे राष्ट्रीय स्तर के सार्वजनिक प्रश्नों का उत्तर स्वयं देंगे, या यह जिम्मेदारी हमेशा दूसरे लोग निभाते रहेंगे? पीसीसी चीफ ने कहा कि कांग्रेस ने कभी मुख्यमंत्री के सामाजिक, व्यक्तिगत या पारिवारिक जीवन पर टिप्पणी नहीं की। कांग्रेस का आग्रह केवल इतना है कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता के वही मानक लागू होने चाहिए, जिनकी अपेक्षा सरकार आम नागरिकों से करती है!

श्री पटवारी ने कहा कि भाजपा द्वारा बार-बार यह कहना कि “सत्य सामने आ चुका है”, अपने आप में पर्याप्त नहीं है। यदि सरकार मानती है कि सारे आरोप निराधार हैं, तो उसे तथ्यों के साथ मुख्यमंत्री की प्रत्यक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करनी चाहिए और यदि सरकार का यह भी मानना है कि राष्ट्रीय समाचार पत्र ने तथ्यात्मक रूप से गलत रिपोर्ट प्रकाशित की है, तो उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जानी चाहिए। क्योंकि, लोकतंत्र में केवल खंडन पर्याप्त नहीं होता, तथ्य और जवाबदेही भी अपेक्षित होती है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री का “मौन” अब स्वयं एक सार्वजनिक प्रश्न बन चुका है। लोकतंत्र में कई बार उत्तर विवाद समाप्त कर देते हैं, जबकि “मौन” विवाद को लंबा कर देता है, इसलिए मध्य प्रदेश की जनता अब किसी मंत्री या प्रवक्ता का नहीं, सीधे मुख्यमंत्री का पक्ष सुनना चाहती है।

श्री पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इस विषय को सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही और पारदर्शिता के सिद्धांत के रूप में भी उठा रही है। मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मुख्यमंत्री का सार्वजनिक संवाद केवल राजनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व है! इसीलिए, आज प्रश्न कांग्रेस के नहीं हैं। ये प्रश्न मध्य प्रदेश के हैं और इन प्रश्नों का उत्तर भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ही दे सकते हैं!