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कंट्रोलर एवं डिप्टी कंट्रोलर पर उठे ‘पद की अयोग्यता अथवा कथित कारोवार के संरक्षण’ के सवाल?

फैक्ट्री के पास ही इसी कॉलोनी में हैं दोनों अधिकारियों के निवास, सर्किल प्रभारी से छिपाकर हुई कार्रवाई?

भोपाल/इंदौर। इंदौर में दिनांक 26 जून 2026 की देर रात्रि रिहायशी कॉलोनी में संचालित कथित अवैध शराब निर्माण फैक्ट्री पर आबकारी विभाग की कार्रवाई के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर आबकारी नियंत्रक एवं डिप्टी कंट्रोलर मीडिया के सामने यह दावा कर रहे हैं कि विभाग इस पूरे नेटवर्क की नेशनल/इंटरनेशनल सप्लाई चेन तथा वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पूरे घटनाक्रम में स्वयं विभागीय अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

पूरा मामला शहर के पॉश इलाके तुलसी नगर क्षेत्र की रिहायशी कॉलोनी के बीच संचालित कथित अवैध शराब निर्माण फैक्ट्री का है। आबकारी विभाग ने बहुमंजिला बंगले पर दबिश देकर 144 बल्क लीटर (16 पेटी) शराब, स्प्रिट, कैरेमल, दो बड़ी ब्लेंडर मशीनें, फर्जी होलोग्राम तथा बड़ी मात्रा में डुप्लीकेट लेबल एवं पैकिंग सामग्री जब्त की। विभाग ने मौके से विनोद पालेया (45), पिता धन्नालाल पालेया, निवासी 21CA तुलसी नगर को गिरफ्तार कर आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया, जबकि मौके पर संदिग्धों की संख्या अधिक बताई जा रही है।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिन अधिकारियों—कंट्रोलर देवेश चतुर्वेदी और डिप्टी कंट्रोलर मनोज अग्रवाल—पर पूरे जिले में आबकारी व्यवस्था की निगरानी, नियंत्रण एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी है, उन्हीं के निवास के आसपास स्थित छोटी-सी कॉलोनी में कथित रूप से अवैध शराब निर्माण की फैक्ट्री कैसे संचालित होती रही? यदि यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी तो क्या यह विभागीय संरक्षण का मामला है, अथवा संबंधित अधिकारी अपने दायित्वों के निर्वहन में पूरी तरह विफल रहे? दोनों ही स्थितियां गंभीर जांच का विषय हैं।

कार्रवाई करने वाली टीम में कंट्रोलर देवेश चतुर्वेदी, डिप्टी कंट्रोलर मनोज अग्रवाल, एडीओ जहांगीर खान, एडीओ सी.के. साहू, एडीओ आकांक्षा शर्मा, एडीओ निधि शर्मा तथा घटनास्थल के सर्किल ‘मालवा मिल-बी’ के आबकारी उप निरीक्षक सुनील मालवीय शामिल थे। उल्लेखनीय है कि संबंधित सर्किल की प्रभारी प्रीति चौबे को कथित तौर पर इस कार्रवाई की भनक तक नहीं लगने दी गई। यह तथ्य भी अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभाग ने कार्रवाई के दौरान केवल विनोद पालेया को आरोपी बनाया है, जबकि मौके पर अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की मौजूदगी की भी चर्चा है। अपुष्ट सूत्रों के अनुसार यह फैक्ट्री ठेके पर संचालित की जा रही थी और इसका मुख्य सरगना कोई अन्य व्यक्ति है, जिसके तार उज्जैन से जुड़े बताए जा रहे हैं।

पूरे घटनाक्रम में आबकारी नियंत्रक देवेश चतुर्वेदी के साथ मनोज अग्रवाल की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इस कार्रवाई की भ्रामक जानकारी जिला कलेक्टर शिवम वर्मा को दी गई। यह भी कहा जा रहा है कि संभवतः कलेक्टर को इस तथ्य की जानकारी नहीं होगी कि कंट्रोलर चतुर्वेदी और डिप्टी कंट्रोलर अग्रवाल के निवास भी इसी छोटी-सी पॉश कॉलोनी तुलसी नगर में इसी फैक्ट्री के आसपास स्थित हैं, जहां कथित रूप से यह अवैध शराब निर्माण गतिविधि संचालित हो रही थी।

आबकारी विभाग की कार्रवाईइस पूरे मामले में आबकारी विभाग एवं आम जनता की ओर से जिला कलेक्टर शिवम वर्मा तथा मध्य प्रदेश आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना से अपेक्षा की जा रही है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ कराई जाए। यदि विभाग वास्तव में नेशनल/इंटरनेशनल सप्लाई चैन और वित्तीय लेन-देन की गहराई तक जाने का दावा कर रहा है, तो जांच का दायरा आबकारी नियंत्रण कार्यालय और संबंधित अधिकारियों की भूमिका तक भी अवश्य पहुंचना चाहिए, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और विश्वसनीय सच्चाई सामने आ सके।

(नोट: उपरोक्त समाचार में लगाए गए आरोप उपलब्ध जानकारी, दावों एवं अपुष्ट सूत्रों पर आधारित हैं। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा)