“चिट्ठी ना कोई संदेश… समाज का देवता अनंत यात्रा पर..
ग्वालियर 26 जनवरी 2026। आदरणीय सम्माननीय साहब डॉ. जे. एस. सिकरवार का यूँ असमय, अचानक और पीड़ादायक रूप से हमारे बीच से चले जाना न केवल सिकरवार परिवार, बल्कि पूरे नात शरीफ समाज और असंख्य मरीजों के लिए गहरा आघात है। यद्यपि सेवानिवृत्ति हो गए थे मगर समाज के लिए आज भी सेवारत थे।
जेएएच ग्वालियर जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान में अधीक्षक जैसे दायित्वपूर्ण पद पर रहते हुए भी उन्होंने कभी पद, प्रतिष्ठा या अधिकार को अपने व्यवहार पर हावी नहीं होने दिया।
उन्होंने चिकित्सा को नौकरी नहीं, बल्कि सेवा और धर्म की तरह जिया।
आमजन हो या गंभीर रोगी—हर किसी के लिए उनका दरवाज़ा, उनका मन और उनका दिल हमेशा खुला रहा।
उनके मानवीय कार्यों, निस्वार्थ सहयोग और संवेदनशीलता की फेहरिस्त बहुत लंबी है, जिसे शब्दों में समेट पाना संभव नहीं।
दिनांक 25 जनवरी 2026 को प्रातः मॉर्निंग वॉक के दौरान हरिशंकरपुरम से विवेकानंद नीड़म जाते समय रेलवे पटरी पार करते वक्त हुई ट्रेन दुर्घटना ने हमसे एक ऐसा रत्न छीन लिया, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।
आज परिवार का देवतुल्य स्तंभ अनंत यात्रा पर निकल गया।
मन भारी है… शब्द साथ नहीं दे रहे…
“चिट्ठी ना कोई संदेश, जाने वो कौन सा देश,
जहाँ तुम चले गए… कहाँ तुम चले गए…”
डॉ. सिकरवार जैसे लोग देह से चले जाते हैं, पर अपने कर्मों, अपने संस्कारों और अपनी सेवा के माध्यम से हमेशा समाज में जीवित रहते हैं।
उनका जाना एक व्यक्तिगत नहीं, सामाजिक क्षति है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकसंतप्त परिवार को यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
“रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई,
तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई।”
भावपूर्ण श्रद्धांजलि।ॐ शांति ॐ।
