उमरधा/नई दिल्ली 23 मार्च 2026। होशंगाबाद-नरसिंहपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद दर्शन सिंह चौधरी इन दिनों क्षेत्रीय विकास से लेकर राष्ट्रीय स्तर की नीतिगत पहलों तक सक्रिय भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। एक ओर जहां उन्होंने उमरधा के हाट बाजार में आयोजित नरवाई प्रबंधन कार्यशाला में किसानों से वर्चुअल संवाद कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर संसद और संसदीय समिति की बैठकों में तकनीकी शिक्षा और महिला-बाल विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक सुझाव रखे।
उमरधा में आयोजित कार्यशाला में सांसद चौधरी ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेष (नरवाई) को जलाने के बजाय उसके वैज्ञानिक प्रबंधन को अपनाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नरवाई जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा संरक्षण और फसल अवशेष प्रबंधन के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी। प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया कि नरवाई जलाने की घटनाओं पर सैटेलाइट के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है, इसलिए किसान इससे बचें और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें।
इसी सक्रियता का विस्तार संसद तक भी देखने को मिला, जहां सांसद चौधरी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने तकनीकी शिक्षा में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अब देश के कई संस्थानों में इंजीनियरिंग और तकनीकी पाठ्यक्रम भारतीय भाषाओं में संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही, तकनीकी पुस्तकों के अनुवाद, ‘ई-कुम्भ’ पोर्टल और ‘अनुवादिनी’ एप जैसी पहलों के माध्यम से छात्रों के लिए मातृभाषा में शिक्षा को सुलभ बनाया जा रहा है। वहीं, संसदीय स्थायी समिति की बैठक में भी सांसद चौधरी ने महिला सशक्तिकरण, बाल संरक्षण, पोषण और आंगनवाड़ी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर देते हुए ठोस सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुंचे, इसके लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत करना होगा।
समग्र रूप से, सांसद दर्शन सिंह चौधरी की पहलें यह दर्शाती हैं कि वे एक ओर जहां जमीनी स्तर पर किसानों और पर्यावरण के मुद्दों को लेकर सजग हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षा, महिला और बाल विकास जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर भी सक्रियता से काम कर रहे हैं। उनके ये प्रयास क्षेत्रीय विकास और राष्ट्रीय नीति—दोनों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
