ऑनलाइन प्रक्रिया के नाम पर ऑफलाइन खेल..
भिंड/अटेर, 29 मार्च 2026। महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की नियुक्ति को लेकर पारदर्शिता के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। भिंड जिला के अटेर ब्लॉक से सामने आए सनसनीखेज आरोपों ने पूरे सिस्टम पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
आरोप है कि परियोजना अधिकारी (CDPO) राहुल गुप्ता ने ऑनलाइन प्रक्रिया को दरकिनार कर ऑफलाइन कागजी खेल के जरिए नियुक्तियों को “कमाई का जरिया” बना लिया है।
ऑनलाइन सिस्टम की आड़ में ‘वसूली तंत्र’!
नियमानुसार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन होते हैं और चयन के बाद नियुक्ति पत्र जारी किया जाता है। इसके पहले एसडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी से अनुमोदन अनिवार्य होता है, जिसमें जनपद CEO, CDPO (महिला-बाल विकास विभाग) और दो जनप्रतिनिधि शामिल रहते हैं।
लेकिन सूत्रों का दावा है कि CDPO गुप्ता इस पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर कमेटी को अंधेरे में रखते हैं। आरोप है कि अनुमोदन औपचारिकता बनकर रह गया है और असली खेल बाद में शुरू होता है_जब चयनित हितग्राहियों को नियुक्ति पत्र के नाम पर डरा कर उससे वसूली की जाती है।
फर्जी कागज दिखाकर डराना, ‘चढ़ौती’ नहीं तो नियुक्ति लटकाना
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार, चयन सूची बनने के बाद हितग्राहियों को ऑफलाइन फर्जी दस्तावेज दिखाकर यह कहा जाता है कि किसी अन्य व्यक्ति का चयन हुआ है। इसके बाद “समाधान” के नाम पर कथित रूप से मोटी रकम की मांग की जाती है।
इस पूरे कथित भ्रष्टाचार में एक सुपरवाइजर मैडम की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जो इस वसूली तंत्र को जमीन पर संचालित करने में सहयोग करती हैं।
जमीनी उदाहरणों ने खोली पोल
जहां एक ओर_ ग्राम पंचायत मोंधना के गांव खेड़ा/छोंदा) में कथित तौर पर “पेशगी” के आधार पर नियुक्ति कर दी गई,
तो वहीं दूसरी ओर_ ग्राम पंचायत गढ़ा के गांव उद्दनपुरा में हितग्राही सहायिका का नाम सूची में प्रथम स्थान पर होने के बावजूद उसकी नियुक्ति अटकी हुई है, क्योंकि इसी दौरान हितग्राही के पति गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने के चलते वह कथित “कमिटमेंट” पूरा नहीं कर सकी।
बताया जा रहा है कि संबंधित हितग्राही को एक ऐसे “बघेल” नाम के व्यक्ति के चयन के फर्जी दस्तावेज दिखाए गए जिसका उस गांव में कोई अस्तित्व ही नहीं है।
सालों से जमे सीडीपीओ का गोरख धंधा..!
गंभीर आरोप यह भी हैं कि CDPO गुप्ता पिछले 7-8 वर्षों से अटेर में पदस्थ हैं और इस दौरान बड़ी संख्या में नियुक्तियों में इसी तरह की अनियमितताएं की गईं। इतना ही नहीं, आंगनवाड़ी केंद्रों के निरीक्षण के नाम पर भी नियमित वसूली का कथित सिलसिला जारी है।
इस पूरे मामले में कमेटी की अध्यक्ष एसडीम शिवांगी अग्रवाल को मूकदर्शक ना रहते हुए अपनी सक्रिय एवं अध्यक्षी भूमिका निभानी चाहिए और सीडीपीओ गुप्ता के दौरान हुई सभी नियुक्तियों की विधिवत जांच करते हुए इस गोरख धंधे के संचालन कर्ताओ पर नकेल कसने की जरूरत है।
अब देखने वाली बात है कि हितग्राहियों के हक पर खुला डाका वाले इस मामले मे क्या एसडीम, महिला एवं बाल विकास विभाग अथवा जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएगा या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? सवाल यह भी है कि इस पूरे मामले में चयन समिति तमाशाबीन की भूमिका में क्यों बनी रही!
