भोपाल/नई दिल्ली। देश में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। सरकारें और संबंधित मंत्रालय सड़क सुरक्षा को लेकर अनेक अभियान चला रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे पर होने वाले हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर एक जागरूक नागरिक ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
नागरिक ने अपने पत्र में हाल ही में हुई एक दर्दनाक घटना का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि उनके पड़ोसी का इकलौता 30 वर्षीय पुत्र 1 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के कन्नौज के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया। इस हादसे ने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं।
ओवर स्पीडिंग और ड्रिंक एंड ड्राइव पर तकनीक आधारित नियंत्रण ही बन सकता है सड़क सुरक्षा का नया मंत्र
पत्र में सड़क दुर्घटनाओं के दो प्रमुख कारणों की ओर ध्यान दिलाया गया है—अत्यधिक गति (ओवर स्पीडिंग) और शराब पीकर वाहन चलाना (ड्रिंक एंड ड्राइव)।
पत्र लेखक का कहना है कि ओवर स्पीडिंग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकार को सभी वाहनों में अनिवार्य रूप से स्पीड गवर्नर लगाने की व्यवस्था करनी चाहिए। उनका तर्क है कि जब देश के एक्सप्रेस-वे पर कारों की अधिकतम निर्धारित गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा है, तो वाहन निर्माता कंपनियां 180, 200 अथवा उससे अधिक गति क्षमता वाले वाहन क्यों बना रही हैं? यदि निर्धारित सीमा से अधिक गति अवैध है, तो वाहनों की गति भी उसी सीमा तक तकनीकी रूप से नियंत्रित की जानी चाहिए।
उसने सुझाव में कहा कि प्रत्येक वाहन में ऐसा स्पीड गवर्नर लगाया जाए जो सड़क की अधिकतम अनुमत गति सीमा से अधिक वाहन को चलने ही न दे। इससे दुर्घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
दूसरे महत्वपूर्ण सुझाव में उन्होंने शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर अंकुश लगाने के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग की बात कही है। उनका कहना है कि वाहनों में ऐसे सेंसर विकसित किए जाएं जो चालक के नशे में होने का पता लगा सकें। यदि चालक शराब के प्रभाव में पाया जाए तो वाहन स्वतः स्टार्ट न हो या उसे राष्ट्रीय राजमार्गों एवं एक्सप्रेस-वे पर प्रवेश की अनुमति न मिले।
पत्र में कहा गया है कि सड़क दुर्घटनाएं केवल आंकड़े नहीं होतीं, बल्कि इनके पीछे टूटते परिवार, उजड़ते घर और असमय समाप्त होती जिंदगियां होती हैं। इसलिए सड़क सुरक्षा को केवल प्रशासनिक विषय न मानकर राष्ट्रीय जनहित का मुद्दा समझा जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि तकनीक आधारित सुरक्षा उपायों को व्यापक स्तर पर लागू किया जाए तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है। अब देखना यह होगा कि नागरिक द्वारा दिए गए इन सुझावों पर सरकार और नीति निर्माता कितना गंभीरता से विचार करते हैं।
