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Freedom ₹251 का सपना: 10 साल बाद भी अधूरा हिसाब!

7.5 करोड़ रजिस्ट्रेशन का दावा, करीब 30 हजार ने किया था भुगतान; लेकिन आखिर कितने फोन सचमुच लोगों तक पहुंचे?

बृजराज सिंह। फरवरी 2016 में देश ने एक ऐसा दावा सुना, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया—स्मार्टफोन सिर्फ ₹251 में। नोएडा की कंपनी Ringing Bells ने इसे Freedom 251 नाम दिया। देखते ही देखते कंपनी ने करीब 7.5 करोड़ रजिस्ट्रेशन का दावा कर दिया। लेकिन कहानी का सबसे बड़ा सवाल आज भी यही है—इन करोड़ों दावों के मुकाबले वास्तव में कितने फोन उपभोक्ताओं के हाथ पहुंचे?

कंपनी के मुताबिक शुरुआती दौर में करीब 30 हजार लोगों ने भुगतान कर फोन बुक किया था। वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक के बाद भुगतान व्यवस्था चरमरा गई और बाद में ऑनलाइन भुगतान वापस करने तथा कैश-ऑन-डिलीवरी मॉडल अपनाने की बात कही गई।

करोड़ों का दावा, हजारों की डिलीवरी

यहीं से Freedom 251 की चमक फीकी पड़ने लगी। कंपनी ने पहले 5 हजार फोन की डिलीवरी शुरू करने की घोषणा की और फिर 65 हजार और फोन देने का दावा किया। बाद में कंपनी की ओर से लगभग 70 हजार फोन डिलीवर किए जाने की बात सामने आई। लेकिन इसके बाद करोड़ों रजिस्ट्रेशन के मुकाबले वास्तविक अंतिम डिलीवरी का कोई स्पष्ट, स्वतंत्र सार्वजनिक आंकड़ा सामने नहीं आया।

यानी कंपनी के अपने आंकड़ों को आधार मानें तो 7.5 करोड़ रजिस्ट्रेशन और करीब 70 हजार डिलीवरी के बीच जमीन-आसमान का अंतर था। और यही इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा सवाल है—क्या 7.5 करोड़ वास्तव में खरीदार थे या सिर्फ वेबसाइट पर दर्ज रुचि?

मोदी सरकार की योजना नहीं थी—फिर सरकारी नाम क्यों आया?

Freedom 251 को लेकर एक भ्रम आज भी कायम है कि यह मोदी सरकार की ₹251 मोबाइल योजना थी। तथ्य यह है कि यह सरकार की योजना नहीं, बल्कि एक निजी कंपनी का व्यावसायिक प्रस्ताव था।

हालांकि विवाद बढ़ने पर सरकारी एजेंसियों ने मामले की जांच की। कीमत की व्यवहारिकता, नियामकीय मंजूरी और कंपनी के दावों पर सवाल उठे। बाद में कंपनी से जुड़े लोगों के खिलाफ अलग-अलग मामलों में कानूनी कार्रवाई भी हुई। 2016 में कंपनी को एक ₹2 करोड़ के चेक-बाउंस मामले में अदालत से समन तक मिला था।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी व्यक्ति या कंपनी पर लगे आरोप को अंतिम न्यायिक दोषसिद्धि मानना सही नहीं होगा। लेकिन विवादों की पूरी श्रृंखला यह जरूर बताती है कि ₹251 का सपना जितना बड़ा था, उसकी व्यावसायिक और कानूनी जमीन उतनी ही विवादित रही।

दस साल बाद बचता क्या है?

Freedom 251 आज बाजार में कोई स्थापित मोबाइल ब्रांड नहीं है। दस साल बाद इस कहानी की सबसे बड़ी सीख फोन की कीमत नहीं, बल्कि दावे और वास्तविकता के बीच का अंतर है। 7.5 करोड़ रजिस्ट्रेशन—करीब 30 हजार शुरुआती भुगतान—और लगभग 70 हजार डिलीवरी का कंपनी दावा।

आंकड़े खुद सवाल पूछते हैं_₹251 में स्मार्टफोन का सपना शायद तकनीक से ज्यादा उम्मीद का कारोबार था। दस साल बाद भी उसका सबसे बड़ा हिसाब यही है—दावा कितना था और हकीकत कितनी?