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परिवहन विभाग में बदलाव की रफ्तार, डिजिटल सेवाओं से सुगम परिवहन तक नई कार्यप्रणाली

परिवहन आयुक्त उमेश जोगा के नेतृत्व में व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिक-केंद्रित बनाने पर जोर

भोपाल। मध्य प्रदेश का परिवहन विभाग पिछले कुछ समय से अपनी कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। विभाग की सेवाओं के डिजिटलीकरण से लेकर सार्वजनिक परिवहन के विस्तार और सड़क सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं तक कई स्तरों पर बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। इस पूरी कवायद में परिवहन आयुक्त उमेश जोगा की प्रशासनिक सक्रियता को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

52 सेवाएं फेसलेस, देश में दूसरा स्थान

परिवहन विभाग की उपलब्धियों में सबसे उल्लेखनीय पहल फेसलेस सेवाओं का विस्तार है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में लाइसेंस, वाहन पंजीयन और परमिट सहित 58 सेवाओं में से 52 सेवाएं फेसलेस उपलब्ध कराई जा रही हैं और इस मामले में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंचा है। इसका सीधा उद्देश्य परिवहन कार्यालयों में अनावश्यक भौतिक संपर्क कम करना और नागरिकों को घर से ही अधिक सेवाएं उपलब्ध कराना है।

सुगम परिवहन और सड़क सुरक्षा पर फोकस

25 सितंबर को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ के साथ प्रदेश में सार्वजनिक बस परिवहन को नए स्वरूप में विस्तार देने की शुरुआत हुई। पहले चरण में सात शहरों को जोड़ते हुए 351 बसें शुरू की गईं। बसों में CCTV कैमरे, पैनिक बटन और लाइव लोकेशन ट्रैकिंग जैसी व्यवस्थाएं रखी गई हैं तथा कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से बसों की निगरानी का प्रावधान किया गया है।

वहीं सरकार ने परिवहन विभाग की 11 योजनाओं के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल 1,166.60 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इसमें स्मार्ट कार्ड योजना, ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र, ग्रामीण परिवहन नीति, नेक व्यक्ति पुरस्कार और सार्वजनिक परिवहन में महिला सुरक्षा जैसी योजनाएं शामिल हैं।

सीमित अमले के बावजूद सुधार की दिशा

प्रदेश में करीब ढाई करोड़ पंजीकृत वाहनों के बीच परिवहन विभाग के सामने मानव संसाधन की चुनौती भी बड़ी है। इसी को देखते हुए कैडर रिव्यू के जरिए पदों में वृद्धि और 874 पदों को भरने की तैयारी की जा रही है। परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने भी कैडर रिव्यू प्रस्ताव तैयार किए जाने की जानकारी दी है।

परिवहन विभाग के सामने चुनौतियां अभी कम नहीं हुई हैं, लेकिन फेसलेस सेवाओं के विस्तार, सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देने, सड़क सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को निरंतरता देने और मानव संसाधन मजबूत करने के प्रयास यह संकेत देते हैं कि विभाग अब केवल वाहन जांच और राजस्व वसूली तक सीमित रहने के बजाय तकनीक, सुविधा, सुरक्षा और पारदर्शिता को अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

परिवहन आयुक्त उमेश जोगा के प्रभावशाली इन प्रयासों को एक अधिक व्यवस्थित प्रशासनिक दिशा मिलती दिखाई दे रही है। आने वाले समय में इन योजनाओं का वास्तविक असर नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता और परिवहन व्यवस्था की पारदर्शिता से तय होगा।