135 सीएमओ स्तर के अधिकारी भी जांच के दायरे में; 80 से अधिक ठेकेदारों-सप्लायर्स पर कार्रवाई, 3 से 4 करोड़ रुपये की वसूली
भोपाल 25अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी सामानों की खरीदी और निर्माण कार्यों से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं पर सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के अनुसार, प्रदेशभर में 392 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें से 7 को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। करीब 135 मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) स्तर के अधिकारी भी कार्रवाई के दायरे में हैं। वहीं, कथित तौर पर गलत दरों पर सामग्री की आपूर्ति करने वाले 80 से अधिक ठेकेदारों और सप्लायर्स पर भी शिकंजा कसा गया है।
खरीदी से लेकर भुगतान तक सवालों के घेरे में व्यवस्था
यह कार्रवाई नगरीय निकायों में सरकारी धन के इस्तेमाल, सामग्री खरीदी और निर्माण कार्यों से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर की जा रही है। विभागीय कार्रवाई में बर्खास्तगी के अलावा वेतनवृद्धि रोकने, पदावनति और वित्तीय वसूली जैसे कदम भी शामिल हैं। सरकार के मुताबिक, संबंधित मामलों में अब तक लगभग 3 से 4 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है।
सबसे अहम सवाल यह है कि जब निकायों में खरीदी और भुगतान की प्रक्रिया में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी-कर्मचारी तैनात हैं, तो कथित अनियमितताएं किस स्तर पर हुईं? क्या केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की जवाबदेही तय होगी या उन अधिकारियों की भूमिका भी जांची जाएगी, जिनके अनुमोदन और निगरानी में खरीदी तथा भुगतान की प्रक्रिया पूरी हुई?
80 से अधिक सप्लायर्स पर कार्रवाई, अब जवाबदेही की परीक्षा
मामले में ठेकेदारों और सप्लायर्स को भी कार्रवाई के दायरे में लाना महत्वपूर्ण है। सरकारी खरीदी में दरों की मंजूरी, बाजार मूल्य से तुलना, सामग्री की गुणवत्ता और भुगतान की जांच जैसे बिंदु वित्तीय जवाबदेही के केंद्र में होने चाहिए। हालांकि, किन सप्लायर्स से कितनी राशि वसूली गई और किन मामलों में अनियमितता की पुष्टि हुई, इसका विस्तृत निकायवार ब्योरा सामने आना अभी बाकी है।
विभाग द्वारा तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से वित्तीय गतिविधियों की निगरानी की बात भी कही गई है। लेकिन वास्तविक पारदर्शिता तभी साबित होगी, जब कार्रवाई के साथ-साथ जांच के निष्कर्ष, जिम्मेदार अधिकारियों के नाम, वसूली की स्थिति और लंबित मामलों का विवरण भी सार्वजनिक हो।
प्रशासनिक सख्ती का दावा, निगरानी व्यवस्था पर भी उठेंगे सवाल
अक्टूबर के मध्य में 23 आईएएस अधिकारियों के तबादलों और 11 जिलों के कलेक्टर बदले जाने की खबरों के बीच नगरीय निकायों में यह कार्रवाई प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र के लिए एक और बड़ी परीक्षा है। हालांकि, तबादले और वित्तीय अनियमितताओं पर कार्रवाई अलग-अलग प्रशासनिक प्रक्रियाएं हैं; दोनों को एक ही अभियान का हिस्सा मानने के लिए अतिरिक्त प्रमाण आवश्यक होंगे।
अब असली कसौटी केवल 392 का आंकड़ा नहीं, बल्कि यह होगी कि सरकारी खजाने को हुए नुकसान की पूरी भरपाई कितनी होती है, दोषियों की जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए क्या ठोस व्यवस्था लागू की जाती है।
