ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दावे ध्वस्त, मध्य प्रदेश को देश के निवेश का सिर्फ़ 3.2%
भोपाल 5 जनवरी 2026। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा निवेश को लेकर किए गए दावे एक बार फिर ज़मीनी हकीकत के सामने पूरी तरह खोखले साबित हुए हैं। फ़रवरी 2025 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सरकार ने 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने का जो दावा किया था, वह अब आंकड़ों के सामने एक बड़ा भ्रम प्रतीत हो रहा है।
विपक्ष का आरोप है कि जितना निवेश मध्य प्रदेश सरकार ने अकेले प्रदेश में होने का दावा किया, उतना निवेश तो पूरे देश में भी नहीं हुआ।
देश बनाम मध्य प्रदेश: आंकड़े खोल रहे हैं पोल
विपक्ष द्वारा सामने रखे गए आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच पूरे देश में कुल निवेश प्रस्ताव: 26.6 लाख करोड़ रुपये जबकि मध्य प्रदेश को इसमें से सिर्फ़ 3.2% हिस्सा ही मिला।
इन आंकड़ों ने सरकार के दावों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि.. इन्वेस्टर्स समिट_ क्या सरकारी धन का सिर्फ एक तमाशा ?
विपक्ष का कहना है कि भाजपा सरकार इन्वेस्टर्स समिट जैसे भव्य आयोजनों के ज़रिये केवल आंकड़ों का खेल खेल रही है। ज़मीनी स्तर पर न तो निवेश उतर रहा है और न ही रोज़गार सृजन हो रहा है, जबकि करोड़ों रुपये सरकारी धन ऐसे आयोजनों पर खर्च कर दिए जाते हैं।
निवेश माँगा नहीं बल्कि आकर्षित किया जाता है
विपक्ष ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि—“निवेश माँगा नहीं जाता, उसे आकर्षित किया जाता है। इसके लिए मज़बूत क़ानून व्यवस्था, लाल फ़ीताशाही में कमी और निवेश के लिए स्पष्ट सेक्टरल विज़न ज़रूरी होता है।”
लेकिन विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश में
क़ानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है,
उद्योगों को अनुमति में भारी देरी है,
और निवेश के प्राथमिक क्षेत्रों की कोई स्पष्ट पहचान नहीं की गई।
भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए विपक्ष ने यह भी कहा कि निवेश के नाम पर जनता को झूठे सपने दिखाए जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि प्रदेश निवेश के मामले में लगातार पिछड़ता जा रहा है। लिहाजा विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि वह इन्वेस्टर्स समिट में हुए समझौता ज्ञापनों (MoU) और ज़मीन पर उतरे वास्तविक निवेश का श्वेत पत्र जारी करे, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
