onwinmarsbahismarsbahismatbetkavbetgalabetmatbetpadişahbetjojobetkavbetkavbet girişgalabetgalabet girişgalabetgalabet girişgalabet güncel girişhızlıcasino girişhızlıcasino girişhızlıcasino girişhızlıcasino girişmavibetmavibet girişgalabet girişgalabetceltabet girişceltabet girişceltabet girişceltabet güncel girişjojobetnakitbahis girişnakitbahis girişnakitbahis girişnakitbahis güncel girişnakitbahis güncel girişmatbetmatbetmatbet girişlunabet girişlunabet girişlunabet güncel girişlunabet güncel girişlunabet girişmatbetmatbet girişjojobetnakitbahispiabellamatbetmatbet girişextrabetextrabetextrabetextrabetextrabetextrabetextrabetextrabet girişextrabet girişextrabet güncel girişextrabet güncel girişmatbetmatbet girişjojobetjojobet girişhızlıcasino girişhızlıcasino girişmatbet girişmatbetmatbetjojobetvaycasinovaycasino girişjojobetjojobet girişaxeprimenakitbahisnakitbahismatbetmatbet girişjojobetjojobetpiabellacasinopiabellacasino girişmatbetmatbet girişprimebahisprimebahis girişmarsbahismarsbahis girişholiganbetimajbetimajbetmatbetmatbet girişmatbet güncel girişcratosroyalbetmatbetholiganbet girişmatbetjojobetjojobet girişbets10bets10 girişultrabetvaycasinovaycasino girişjojobet girişjojobetkavbetmatbetmatbet girişmatbetmatbet girişmatbetmatbet girişjojobethızlıcasino girişhızlıcasino girişzirvebet girişvaycasinovaycasino girişpusulabetpusulabet girişprimebahisprimebahis girişmatbetmatbet girişmatbetmatbet girişmatbetmatbet girişmatbetmatbet girişjojobetjojobet girişmatbetmatbet girişholiganbetjojobet girişjojobetjojobet girişmatbetmatbet girişjojobetjojobetdeneme bonusu veren sitelerjojobetjojobet girişjojobet güncel girişdeneme bonusu veren sitelerholiganbetholiganbet girişholiganbet güncel girişgalabet girişgalabet güncel girişmatbetmatbet girişsetrabetsetrabetmeritkingmeritking girişkavbetkavbet girişkavbetkavbet girişkingroyalkingroyal girişcratosroyalbetcratosroyalbet girişvaycasinovaycasino girişpusulabetmatbetmatbet girişcratosroyalbetcratosroyalbet girişcratosroyalbet güncel girişartemisbetartemisbet girişmatbetmatbet girişsetrabethızlıcasinojojobet girişjojobetjojobetjojobet girişjojobetsetrabetsetrabet girişsetrabet güncelsetrabetsetrabetsetrabetsetrabetsetrabetsetrabethızlıcasinohızlıcasinohızlıcasinohızlıcasino güncel girişpusulabetultrabetjojobetbetnanojojobet girişholiganbetholiganbetvaycasinovaycasino girişpusulabetpusulabet girişmatbetcratosroyalbetcratosroyalbet girişzirvebetzirvebet girişzirvebet güncel girişjojobetjojobet girişprimebahisprimebahis girişcratosroyalbetcratosroyalbet girişmatbet girişholiganbet girişholiganbetmatbetmatbetmatbet girişmatbetmatbet girişholiganbet girişholiganbetholiganbet girişholiganbet güncel girişpusulabetpusulabet girişcratosroyalbetcratosroyalbet girişkingroyalkingroyal giriş

स्मार्ट सिटी ग्वालियर: भ्रष्टाचार का हाईटेक मॉडल ?

38 परियोजनाएं सवालों के घेरे में, ईडी जांच ठंडे बस्ते में – न सभापति को याद, न महापौर को खबर!

ग्वालियर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट कही जाने वाली “स्मार्ट सिटी ग्वालियर” अब भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और अफसरशाही की मिलीभगत का प्रतीक बनती जा रही है। करोड़ों की परियोजनाओं पर गंभीर आरोप लगे, नगर निगम परिषद में हंगामा हुआ, यहां तक कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच के आदेश तक पारित हुए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि दो साल बाद भी न जांच शुरू हुई, न किसी को इसकी सुध है।

सबसे चौंकाने वाली स्थिति यह है कि” नगर निगम के सभापति और महापौर खुद कह रहे हैं कि उन्हें जांच की जानकारी नहीं, वहीं वर्तमान और पूर्व निगम आयुक्त जांच को ही औचित्यहीन बता रहे हैं”।
तो सवाल उठता है—क्या ईडी जांच सिर्फ जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए थी?

ईडी जांच : आदेश हुआ, फिर दफन कर दिया गया!

नगर निगम परिषद में घटिया क्वालिटी और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते 21 अक्टूबर 2024 को सभापति मनोज तोमर द्वारा पार्षदों की वोटिंग के आधार पर ईडी जांच के आदेश जारी किए गए थे।
लेकिन आज स्थिति यह है कि— न सभापति को याद, न महापौर को जानकारी और न ही जांच की कोई प्रगति है।
इतना ही नहीं, बाद में ईडी जांच पर पुनर्विचार की सिफारिश कर दी गई, यह कहकर कि यह आदेश नियम 2005 के तहत अवैध है क्योंकि बैठक महापौर परिषद की थी, जिसे आयुक्त ने बुलाया था।

निगम परिषद में हंगामा
तत्कालीन आयुक्त ने इस ठहराव को परिषद में दोबारा रखने और कानूनी कार्रवाई की जरूरत भी बताई—लेकिन उस पर भी चुप्पी साध ली गई।

जांच के नाम पर अब तक क्या हुआ? सिर्फ तारीखें और बहाने
तमाम शिकवा- शकायतें एवं हंगामों के चलते 19 अक्टूबर 2024 तत्कालीन कमिश्नर अमन वैष्णव ने अपर आयुक्त और उपायुक्त की कमेटी बनाई. रिपोर्ट की समयसीमा 19 अक्टूबर 2024 निर्धारित की गई लेकिन जांच शुरू ही नहीं हुई।
21 अक्टूबर 2024 निगम परिषद से ईडी जांच के आदेश पारित
23 अक्टूबर 2024 स्मार्ट सिटी के सीईओ ने दस्तावेज देने से इनकार किया, भोपाल मार्गदर्शन के लिए पत्र लिखा और ईडी जांच वहीं ठप हुई।

आज स्थिति यह है कि_वर्तमान कमिश्नर संघप्रिय स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को “परिदर्शिता के साथ” होना बता रहे हैं वहीं पूर्व कमिश्नर विनोद शर्मा ईडी जांच को ही “बेबुनियाद” करार दे रहे हैं। यानी जांच पर भी सवाल, सवाल उठाने वालों पर भी सवाल!

38 परियोजनाएं, हजारों करोड़ और जवाब शून्य

पिछले 8 वर्षों में स्मार्ट सिटी ग्वालियर की 38 परियोजनाएं सवालों के घेरे में हैं। जिनमें मुख्य रूप से_
🔴 5 करोड़ की बाइक शेयरिंग योजना– मॉनिटरिंग के अभाव में पूरी तरह फेल– भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी
🔴 2 करोड़ की पेडेस्ट्रियन जोन निर्माण परियोजना
– न गुणवत्ता, न उपयोगिता
🔴 40 करोड़ का स्मार्ट एलईडी लाइट प्रोजेक्ट– शहर में लगी लाइटें, लेकिन अंधेरे में जवाबदेही
🔴 3 करोड़ की बोर्ड और सोलर ट्रैफिक सिग्नल योजना– न ट्रैफिक सुधरा, न सिस्टम चला
🔴 आईएसबीटी परियोजना– लागत 55 करोड़ से बढ़कर 65 करोड़– प्रशासनिक इच्छाशक्ति के अभाव में आज भी अधूरी
🔴 13 करोड़ का स्मार्ट प्रवेश द्वार– लोकार्पण से पहले ही क्षतिग्रस्त– करोड़ों खर्च, लेकिन टिकाऊ निर्माण शून्य

मिलीभगत, मौन और मैनेजमेंट : स्मार्ट सिटी का यही असली चेहरा उजागर हो रहा है और तस्वीर अब साफ है— परियोजनाएं फेल, जांच ठंडे बस्ते में, जिम्मेदार मौन, अफसर और जनप्रतिनिधि एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते हुए बरी।

ऐसा प्रतीत होता है कि स्मार्ट सिटी ग्वालियर भ्रष्टाचार का “स्मार्ट मॉडल” बन चुकी है, जहां आदेश भी दिखावे के, जांच भी कागजों की और नुकसान सिर्फ जनता का।
अब सवाल सिर्फ इतना है—क्या ग्वालियर स्मार्ट सिटी में कभी सच सामने आएगा या यह प्रोजेक्ट हमेशा सिस्टम की मिलीभगत में दफन रहेगा ?