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शासकीय नाले की अरबों की जमीन से हटेगा कब्जा

शासकीय अभिलेखों से निजी स्वामित्व हटाने के आदेश

ग्वालियर 10 जुलाई 2024। प्रशासन की अनदेखी अथवा मिली भगत से भूमाफियाओं एवं अतिक्रमणकारियों द्वारा शहरों के सभी नालों पर हो रहे लगातार अतिक्रमण की वजह से वर्षा के दौरन ग्वालियर सहित अन्य शहरों मे जल भराव की भयावय स्थिति होती जा रही है जिसे बचाने के लिए कुछ जिम्मेदार नगरिक लगातार संघर्ष कर रहे हैं। इस क्रम में ताजा मामला सामने आया है।

एजी ऑफिस के बगल से अरबों रुपए कीमत की सरकारी नाले की जमीन मामले में कारोबारी अशोक-यश गोयल के स्वामित्व को संभागीय अपर आयुक्त न्यायालय ने अमान्य करार दिया है साथ ही न्यायालय ने पूरी जमीन को सरकारी नाले की मानकर राजस्व अभिलेखों में रिकॉर्ड सुधार के लिए निर्देशित किया है। आदेश की प्रति कलेक्टर ग्वालियर को अलग से देकर आधिपत्य-कब्जा पाए जाने पर हटाने के लिए भेजी गई है।

साइंस कॉलेज मुख्य मार्ग से शुरू होकर प्रभा होटल से निकलते हुए उसके बगल में स्थित पुलिया से निकलते हुए रेलवे लाइन पुलिया के नीचे से महलगांव तक जाने वाले सरकारी नाले के मामले में अपर आयुक्त राजस्व न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 43/2021-22/अपील पेशी की गई थी।जिसमें अपीलकर्ता महेन्द्र प्रताप सिंह पुत्र स्व. श्रीकृष्ण सिंह निवासी श्रीराम कॉलोनी ने नालेकी जमीन को राजस्व अभिलेखों में अपने नाम कराने के विरूद्ध यश-अशोक गोयल पुत्र स्व.हरिशंकर गोयल निवासी दालबाजार के अलावा जनहित गृह निर्माण संस्था मर्यादित, दाल बाजार के सचिव श्रीकृष्णदास पुत्र युगल किशोर निवासी दाल बाजार व मध्यप्रदेश शासन के खिलाफ की थी। जिसमें बताया

गया था कि महलगांव के सर्वे क्रमांक 1170 (माधव नगर चौराहा से) आकर नाला एजी ऑफिस व श्रीराम कॉलोनी के बीच से निकली सड़क के बगल से होकर सर्वे क्रमांक 1169 में निर्मित पुलिया के नीचे से होकर सर्वे क्रमांक 1080, 1081,1084 से होकर आगे महलगांव रेलवे लाइन पुलिया होकर पटरियों के दूसरी तरफ स्थित सर्वे क्रमांक 956 तक गया है और वह सरकारी रिकार्ड में सरकारी नाले के रूप में दर्ज है।

हेरा फेरी कर सरकारी नाले की जमीन हो गई निजी..

महलगांव के सर्वे क्र. 1080 (.031 हे.) जनहित गृह निर्माण संस्था व सर्वे क्रमांक 1081 सरकारी नाले पर दर्ज है और सर्वे क्र. 1084 (.105 हेक्टेयर) पुराने रिकार्ड में सरकारी नाला दर्ज था मगर अभी खसरो में हरिशंकर गोयल पुत्र रतनलाल निवासी दाल बाजार का नाम दर्ज हो चुका है। भले ही न्यायालय ने अशोक गोयल यश गोयल के विरुद्ध ये आदेश पारित कर दिया हो मगर आज भी मौके पर अपने करिंदों के साथ ये दोनों भाई मौके मुआइने पर मसक्कत करते नजर आए जिन्हें तस्वीर मेंभी देखा जा सकता है।

जलभराव की भयावह स्थिति से बचाने के लिए लाएं इसे मूल स्वरूप में..

अपीलार्थी ने राजस्व निरीक्षक मंडल से महलगांव के सर्वे क्रमांक 1169, 1170, 1081, 1080, 1084, 956 की जांच कराई गई। जिसमें बताया गया कि सरकारी नाले को मूल स्वरूप में लाया जाए क्योंकि इस नाले के बहाव क्षेत्र में रूकावट होने से संपूर्ण क्षेत्र में जलभराव हो रहा है और इससे बारिश के दौरान क्षेत्र में भयावह स्थिति बन जाती है।

इनका अथक प्रयास लाया रंग 

हम लोग काफी समय से यह लड़ाई लड़ रहे हैं जिसमें आज यह सफलता मिली है। राजस्व रिकार्ड व नक्शों में सरकारी नाला दर्ज है। जिसे आज भी देखा जा सकता है और रिकार्ड देखकर व आम लोगों की परेशानी के चलते न्यायालय में वादलाए थे, जिसमें अपर आयुक्त राजस्व द्वारा जमीन को सरकारी नाले की माना गया है और कलेक्टर को आदेश प्रति देकर कब्जा हटाने के लिए निर्देशित किया है। ….*महेन्द्र प्रताप सिंह चौहान, उप पुलिस अधीक्षक (सेवानिवृत्त) श्री राम कॉलोनी