आरटीओ ने कलेक्टर के निर्देश पर की बैठक, ई-बस सेवा से राहत की उम्मीद; लेकिन सार्वजनिक परिवहन और दूरी की समस्या बनी सबसे बड़ी बाधा
ग्वालियर, 5 जुलाई 2026। सतत्तर करोड़ की लागत से बने शहर के इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) को सुचारु रूप से संचालित करने और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के निर्देश पर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी विक्रमजीत सिंह कंग ने बस ऑपरेटरों की बैठक आयोजित की। बैठक में प्रशासन ने बस संचालकों से सहयोग का आग्रह किया, वहीं बस ऑपरेटरों ने भी आईएसबीटी के सफल संचालन में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
बैठक में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने बताया कि शीघ्र ही शहर में ई-बस सेवा शुरू होने जा रही है, जिससे यात्रियों की आवाजाही आसान होगी और आईएसबीटी तक उनकी पहुंच बेहतर बन सकेगी। उनका कहना था कि इससे बस ऑपरेटरों को भी पर्याप्त सवारियां मिलने की संभावना बढ़ेगी।
बस ऑपरेटरों ने बताया कि वर्तमान में भिण्ड एवं मुरैना मार्ग की बसों का संचालन आईएसबीटी से किया जा रहा है, लेकिन शुरुआती दौर में यात्रियों की संख्या अपेक्षा से कम रहने के कारण संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समय के साथ ये समस्याएं दूर होंगी। साथ ही उन्होंने अधिक से अधिक बसों का संचालन आईएसबीटी से कराने तथा यात्रियों को वहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देने का भरोसा भी प्रशासन को दिया।
बैठक में आईएसबीटी के वेंडर प्रतिनिधि मनेन्द्र ने जानकारी दी कि जो भी वाहन स्वामी नियमानुसार टिकट काउंटर संचालित करना चाहता है, उसे टिकट काउंटर उपलब्ध कराया जा सकता है। बैठक में बस ऑपरेटर यूनियन के पदाधिकारी बलवीर सिंह तोमर, पदम गुप्ता, हरीशंकर पटेल, देवेन्द्र सिंह जादौन (बबलू), मुरैना से हरि सिंह सिकरवार, मुकेश सिंह एवं रणवीर सिंह सहित स्मार्ट सिटी के प्रतिनिधि सिद्धार्थ पाठक तथा परिवहन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
जमीनी हकीकत अब भी चुनौती पूर्ण
हालांकि आधिकारिक स्तर पर आईएसबीटी के सुचारु संचालन को लेकर सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत की जा रही है, लेकिन व्यवहारिक स्थिति इससे अलग दिखाई देती है। नया आईएसबीटी वर्तमान बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित है, जबकि झांसी रोड पर स्थित शहर के दूसरे बस स्टैंड से इसकी दूरी लगभग 14 से 15 किलोमीटर है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि गोला का मंदिर से आईएसबीटी तक लगभग 6 किलोमीटर के मार्ग में अभी भी पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं है।
इसी कारण यात्रियों को आईएसबीटी तक पहुंचने में अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ रहा है। वहीं बस संचालकों को भी पर्याप्त सवारियां नहीं मिलने से आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में पुराने बस स्टैंड की तुलना में आईएसबीटी से बसों का संचालन यात्रियों और ऑपरेटरों—दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। बस ऑपरेटर्स का यह भी कहना है कि आईएसबीटी के अंतर्गत बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी है।
सिर्फ भवन नहीं, व्यवस्था भी जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आधुनिक बस टर्मिनल की सफलता केवल भव्य भवन से नहीं, बल्कि उसकी आसान पहुंच, पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन, समुचित कनेक्टिविटी और यात्रियों की सुविधा पर निर्भर करती है। यदि प्रशासन शीघ्र ही ई-बस सेवा, फीडर परिवहन, ऑटो-शटल, मार्ग संकेतक और अन्य व्यवहारिक समस्याओं का समाधान नहीं करता, तो 77 करोड़ लागत से बना आईएसबीटी अपनी पूरी क्षमता अनुरूप उपयोग में नहीं आ पाएगा और यह परियोजना केवल दिखावटी उपलब्धि बनकर रह जाने का खतरा पैदा हो सकता है?
